हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा वित्त पोषित 1.69 करोड़ रुपये की दो प्रतिष्ठित अनुसंधान परियोजनाएं प्राप्त हुई हैं। ये परियोजनाएं नई दिल्ली स्थित परमाणु चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) के माध्यम से वित्त पोषित हैं। एचपीयू के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह ने कहा, “इन परियोजनाओं का उद्देश्य परमाणु एवं विकिरण सुरक्षा, पर्यावरण सुधार, जैव प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय रक्षा के क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना है।”
उन्होंने कहा, “87.60 लाख रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली पहली परियोजना का उद्देश्य परमाणु और विकिरण प्रदूषण को प्रभावी ढंग से दूर करने के लिए उन्नत लिग्नोसेलुलोसिक, पॉलीसेकेराइड और धातु-कार्बनिक ढांचा (एमओएफ) आधारित कार्यात्मक सामग्री विकसित करना है। इस परियोजना का संचालन मुख्य अन्वेषक के रूप में एचपीयू के रसायन विभाग के डॉ. संदीप चौहान करेंगे, साथ ही सह-मुख्य अन्वेषक के रूप में एचपीयू के रसायन विभाग के डॉ. रमेश चंद ठाकुर और भौतिकी विभाग के डॉ. परिक्षित गौतम, किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली होंगे।”
प्रोफेसर महावीर ने कहा, “डीडीआरडीओ के जीवन विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (एलएसआरबी) के माध्यम से 82.10 लाख रुपये के अनुदान से स्वीकृत दूसरी परियोजना एक तीन वर्षीय बहुविषयक अनुसंधान कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य उन्नत जैव प्रौद्योगिकी उपायों के माध्यम से डर्टी बम परिदृश्यों से निपटना है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. रवि कांत भाटिया इस परियोजना के प्रमुख अन्वेषक के रूप में, रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. संदीप चौहान और फॉरेंसिक विज्ञान विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार, एचपीयू, शिमला के सहयोग से कार्य करेंगे।”
उन्होंने दोनों शोध टीमों को इन परियोजनाओं को हासिल करने पर बधाई दी और कहा कि ये परियोजनाएं एचपीयू की बढ़ती शोध क्षमताओं और प्रमुख राष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा इसकी बढ़ती मान्यता को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा, “इन परियोजनाओं के परिणाम परमाणु और विकिरण प्रदूषण को दूर करने, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय रक्षा के क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

