N1Live Haryana हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अधिक वेतन लेकर सरकारी खजाने को कैसे नुकसान पहुंचाया
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हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अधिक वेतन लेकर सरकारी खजाने को कैसे नुकसान पहुंचाया

How Haryana Health Department employees took higher salaries and caused loss to the exchequer

मुख्यमंत्री के हवाई दस्ते ने स्वास्थ्य विभाग में एक कथित घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें कर्मचारियों ने अपने हक से अधिक वेतन लिया। आरोप है कि कर्मचारियों ने अतिरिक्त राशि प्राप्त करने के लिए ई-वेतन पोर्टल पर भत्तों में हेरफेर किया। मुख्यमंत्री के हवाई दस्ते ने शाहजादपुर स्थित बाल चिकित्सालय और नारायणगढ़ स्थित सिविल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान अनियमितताओं का पता लगाया, जिसके परिणामस्वरूप दो एफआईआर दर्ज की गईं और अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की व्यापक जांच शुरू की गई।

कर्मचारियों द्वारा वेतन घोटाला कैसे अंजाम दिया गया

आरोप है कि कर्मचारियों ने सरकारी ई-वेतन पोर्टल में हेराफेरी करके अपनी पात्रता से कहीं अधिक वेतन प्राप्त किया। जांचकर्ताओं और जांच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, कर्मचारियों ने ई-वेतन पोर्टल पर भत्तों की प्रविष्टियों में बदलाव किया और सरकारी खजाने से अतिरिक्त भुगतान का दावा किया।

शाहजादपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्या हुआ?

शाहजादपुर पुलिस स्टेशन में 12 मई को दर्ज एफआईआर के अनुसार, एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) जरनैल सिंह ने तत्कालीन एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद के साथ मिलकर वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान ई-वेतन पोर्टल पर भत्तों में हेराफेरी करके 94 लाख रुपये से अधिक की राशि हड़प ली थी। उन पर सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां करने और गबन करने का आरोप है। दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मुख्यमंत्री के हवाई दस्ते द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान, जरनैल सिंह कथित तौर पर मौके से फरार हो गया। एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और वर्तमान में अवकाश पर हैं।

मुख्यमंत्री के हवाई दस्ते को नारायणगढ़ में क्या मिला?

शाहज़ादपुर में एफआईआर दर्ज होने के बाद, मुख्यमंत्री के फ्लाइंग स्क्वाड को नारायणगढ़ में इसी तरह के घोटाले की सूचना मिली। शिकायतों के आधार पर, फ्लाइंग स्क्वाड और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त टीम ने नारायणगढ़ के सिविल अस्पताल में अचानक निरीक्षण किया। जांच के दौरान, अधिकारियों का ध्यान उप अधीक्षक सुभाष चंद और वार्ड सेवक मोहन लाल पर केंद्रित था, जो पिछले साल अगस्त में सेवानिवृत्त हुए थे। 15 मई को दर्ज एफआईआर के अनुसार, सुभाष चंद वेतन और खरीद, चिकित्सा और आकस्मिक खर्चों से संबंधित अन्य बिल तैयार करने के लिए जिम्मेदार थे। कर्मचारी 12 मई से छुट्टी पर थे, जिस दिन शाहज़ादपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी।

उप अधीक्षक के खिलाफ आरोप

उप अधीक्षक अतिरिक्त वेतन प्राप्त करने के लिए पोर्टल पर भत्तों में फर्जी प्रविष्टियाँ करता था। सुभाष चंद पर एसीपी के बकाया वेतन का दो बार दावा करने का भी आरोप है। उसने मोहन लाल के विशेष भत्तों और अन्य भत्तों में फर्जी प्रविष्टियाँ की थीं। दोनों आरोपियों ने 2023-24 से अतिरिक्त वेतन प्राप्त करके राज्य के खजाने को 21 लाख रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया है।

अब तक की गई कार्रवाई

आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। लेखा अधिकारी दोनों स्वास्थ्य केंद्रों के बिलों और लेन-देन की जांच करेंगे और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

कौन-कौन जांच के दायरे में हैं?

मुख्यमंत्री की फ्लाइंग स्क्वाड का मानना ​​है कि इसमें और भी कर्मचारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। जांचकर्ताओं ने बताया है कि कुछ अधिकारियों की लापरवाही रही है, क्योंकि वे फर्जी प्रविष्टियों का पता लगाने में विफल रहे। आने वाले दिनों में और भी छापेमारी होने की संभावना है। इस मामले ने सरकारी ई-वेतन प्रणाली में नियंत्रण की कमी और पोर्टल तक आधिकारिक पहुंच के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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