राज्य बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने बाज़ार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के तहत खरीदी गई अपनी उपज के भुगतान का दावा करते समय सेब उत्पादकों द्वारा अपनी भूमि के राजस्व दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की अनिवार्यता संबंधी अपने निर्णय में संशोधन किया है। नए आदेश के अनुसार, केवल उन्हीं उत्पादकों को राजस्व दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे जिन्होंने एचपीएमसी को 100 बोरी से अधिक सेब बेचे हैं।
यह संशोधित निर्णय एचपीएमसी के उस फैसले के विरोध के बाद लिया गया है जिसमें राजस्व दस्तावेजों की मांग की गई थी। किसानों ने तर्क दिया कि चूंकि उनके उद्यान कार्ड में उनकी जमीन की सारी जानकारी मौजूद है, इसलिए अतिरिक्त राजस्व दस्तावेजों की मांग उचित नहीं है। एक किसान ने कहा, “मुझे राजस्व अधिकारियों के पीछे क्यों भागना पड़ रहा है जबकि मेरे उद्यान कार्ड में पहले से ही सारी जानकारी मौजूद है?”
इस साल एमआईएस के तहत रिकॉर्ड एक लाख टन छांटे गए सेब खरीदे गए। इतनी अधिक मात्रा में खरीद से प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए भूमि का विवरण मांगा जा रहा है कि बेचे गए सेब उत्पादकों के स्वामित्व वाली भूमि के अनुपात से अधिक तो नहीं थे।
एक किसान ने कहा, “केवल उन किसानों से राजस्व संबंधी कागजात मांगने का निर्णय, जिन्होंने 100 से अधिक बोरियां बेची हैं, छोटे और सीमांत किसानों को राहत प्रदान करेगा।”

