इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), धर्मशाला ने मधुमेह पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम ‘ईएमपीओवर’ का आयोजन किया, जिसमें डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों को इस बीमारी की रोकथाम, उपचार और प्रबंधन में हुई प्रगति पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाया गया। आईएमए-धर्मशाला के अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने संकाय सदस्यों, सत्र अध्यक्षों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए रोगी देखभाल में सुधार के लिए सतत चिकित्सा शिक्षा और साक्ष्य-आधारित पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि टाइप-2 मधुमेह एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरा है और उन्होंने शीघ्र निदान, समय पर उपचार, स्वस्थ आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के महत्व पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि अनियंत्रित मधुमेह हृदय, गुर्दे, आंखों और तंत्रिकाओं को प्रभावित कर सकता है, जबकि नियमित निगरानी, उचित दवा और जीवनशैली में बदलाव से जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने एम्पावर कैस्केड पहल पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत सीएमई कार्यक्रम में भाग लेने वाले डॉक्टरों को अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ अद्यतन चिकित्सा ज्ञान और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज, टांडा के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. धीरज कपूर; डॉ. अनुराग शर्मा, अध्यक्ष, हृदय विज्ञान, पारस अस्पताल, पंचकुला; और डॉ. विनय डोगरा, एंडोक्राइनोलॉजी विभाग, डॉ. आरपीजीएमसी, टांडा। डॉ. विवेक सूद, डॉ. सुजीत रैना, डॉ. विनोद महाजन, डॉ. नितिन, डॉ. अमित वर्मा और डॉ. संधू ने सत्र अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और अकादमिक चर्चाओं का मार्गदर्शन किया।
डॉ. धीरज कपूर ने मधुमेह से संबंधित जटिलताओं, जिनमें उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारी और हृदय विफलता शामिल हैं, पर एक पैनल चर्चा का संचालन किया। चर्चा में गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए शीघ्र निदान, नियमित अनुवर्ती जांच और समन्वित प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया गया।
इन वैज्ञानिक सत्रों ने डॉक्टरों को मधुमेह के उपचार के नए विकल्पों, मधुमेह प्रबंधन के व्यावहारिक दृष्टिकोण और रोगी के परिणामों में सुधार के लिए रणनीतियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। डॉ. अतुल गुप्ता ने कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान देने के लिए संकाय सदस्यों, सत्र अध्यक्षों, प्रतिनिधियों और आयोजन टीम को धन्यवाद दिया।

