October 20, 2026
Himachal

कुल्लू में ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, दो नशीले पदार्थों के तस्करों को रिहा कराया

कुल्लू जिले की लुग घाटी में 17 अक्टूबर को चलाए गए मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में हिंसा भड़क गई। पुलिस का आरोप है कि एक टीम पर हमला किया गया और स्थानीय लोगों के एक समूह ने दो संदिग्धों को जबरन छुड़ा लिया, जिनसे चरस जब्त की गई थी। इस घटना ने विवाद को जन्म दिया है और एक पूर्व पंचायत अध्यक्ष ने पुलिस के बयान पर सवाल उठाए हैं।

पंकुटी-जकले कैंची मोड़ पर हुई घटना के संबंध में पुलिस ने मंगरह पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, उनके पति जीत राम, उपाध्यक्ष राजेंद्र और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, कुल्लू जिला जांच दल ने एक सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए लुग घाटी के जकरेहाद गांव और सुम्मा गांव के दो व्यक्तियों को रोका। उनके बैग की तलाशी में चरस बरामद हुई।

पुलिस का दावा है कि शांति देवी, जीत राम और राजेंदर मौके पर पहुंचे, जिसके बाद 30-40 स्थानीय लोग जमा हो गए और कथित तौर पर पुलिस टीम और एक स्वतंत्र गवाह पर हमला कर दिया। पुलिस का दावा है कि भीड़ ने फिर दोनों संदिग्धों और जब्त किए गए प्रतिबंधित सामान को जबरन अपने साथ ले लिया।

हालांकि, घटनास्थल से 508 ग्राम चरस बरामद हुई, जिसे जब्त कर लिया गया और सील कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि इस घटना में एक पुलिसकर्मी और एक चश्मदीद घायल हो गए, जबकि संदिग्धों द्वारा कथित तौर पर छोड़े गए मोबाइल फोन भी कब्जे में ले लिए गए।

कुल्लू पुलिस स्टेशन में मादक औषधि एवं मनोविकारकारी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 20 और 29 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 191(2), 121(1), 115(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों की पहचान करने, गिरफ्तारियां करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने के प्रयास जारी हैं।

हालांकि, पूर्व पंचायत अध्यक्ष रीना देवी, जिन्होंने घटनास्थल पर मौजूद होने का दावा किया, ने पुलिस के बयान को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह करीब 8 बजे सादे कपड़ों में अज्ञात लोगों का एक समूह नकदी से भरा बैग लेकर आया और ग्रामीणों से चरस खरीदने को कहा। उनके अनुसार, वे कोई पहचान पत्र नहीं दिखा पाए, जिसके कारण ग्रामीणों ने उनसे पूछताछ की।

रीना ने ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मामले को निराधार बताया, घटनास्थल से चरस बरामद होने से इनकार किया और कथित ज़ब्ती का वीडियो सबूत मांगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय शांति देवी वहां मौजूद नहीं थीं। पंचायत उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी।

रीना ने कहा कि पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल स्पष्टीकरण मांगने के लिए 20 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेगा। यह घटना राज्यव्यापी मादक पदार्थों के खिलाफ तेज कार्रवाई के बीच घटी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश में 5,642 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बार-बार अपराध करने वालों, संदिग्ध आपूर्ति नेटवर्क और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर निगरानी भी बढ़ा दी है।

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