पंजाब सरकार ने राज्य भर के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को मानवाधिकारों की सुरक्षा, मृत व्यक्तियों की गरिमा की रक्षा और चिकित्सा-कानूनी तथा शवगृह सेवाओं में सुधार सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा जारी किए गए ये निर्देश पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों, विभिन्न कानूनों के प्रावधानों और संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हैं।
दिशा-निर्देशों का एक प्रमुख बिंदु अस्पताल के बिल या किसी अन्य बकाया शुल्क के भुगतान न होने के कारण शवों को रोके रखने पर सख्त प्रतिबंध है। सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को निर्देश दिया गया है कि वे बकाया राशि की परवाह किए बिना, मृतकों के शवों को बिना किसी देरी के सौंप दें। स्वास्थ्य संस्थानों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी में नोटिस प्रदर्शित करें जिसमें यह लिखा हो कि बकाया भुगतान के कारण किसी भी शव को रोका नहीं जाएगा।
निदेशालय ने संस्थानों को उचित शवगृह कोल्ड-चेन प्रणाली बनाए रखने, विद्युत सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने, डिजिटल तापमान निगरानी प्रणाली स्थापित करने और शवों के प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण के लिए नामित नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है।
राज्य भर में चिकित्सा-कानूनी सेवाओं को सुदृढ़ और मानकीकृत करने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा-कानूनी रिपोर्टों की गुणवत्ता में सुधार करना और ऐसे अभिलेखों को तैयार करने और बनाए रखने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सुनिश्चित करना है। सभी सिविल सर्जनों, चिकित्सा अधीक्षकों और चिकित्सा शिक्षण संस्थानों को इन दिशानिर्देशों को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है।


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