August 31, 2026
National

भारत-उज्बेकिस्तान का जुड़ाव मध्य और दक्षिण एशिया के बीच पुल का काम कर सकता है: उज्बेक मीडिया

India-Uzbekistan engagement can serve as a bridge between Central and South Asia: Uzbek media

उज्बेकिस्तान मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग से दोनों देशों की साझेदारी मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले मुख्य पुलों में से एक बन सकती है। उज्बेकिस्तान नेशनल न्यूज एजेंसी (यूजेडए) की रिपोर्ट में कहा गया, “इन बदलावों के मूल में दोनों देशों के नेताओं की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, बुनियादी मतभेदों का अभाव, दोनों देशों की ऐतिहासिक निकटता और उनकी अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता है। दूसरे शब्दों में, संबंध संस्थागत मजबूती, विस्तारित आर्थिक सामग्री और संयुक्त मूल्य निर्माण की ओर क्रमिक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले आई इस रिपोर्ट में कहा गया कि यह यात्रा “निस्संदेह द्विपक्षीय बातचीत को अतिरिक्त गति प्रदान करेगी, जिससे हुए समझौतों को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी के लिए नई प्राथमिकताओं को निर्धारित करने का अवसर मिलेगा।” रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद ने व्यवस्थित और भरोसेमंद स्वरूप ले लिया है और 2017 के बाद से आमने-सामने और वर्चुअल दोनों प्रारूपों में कम से कम छह उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संपर्क हो चुके हैं।

इसमें कहा गया, “भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन, विदेश नीति विभागों के बीच परामर्श, अंतर-सरकारी आयोग और अंतर-संसदीय संपर्कों ने राजनीतिक बातचीत को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान की है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत और उज्बेकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करने, आतंकवाद का मुकाबला करने, अफगानिस्तान को स्थिर करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने के दृष्टिकोण को साझा करते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “दोनों देश रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाते हैं और गुटबाजी की सोच से मुक्त सहयोग की वकालत करते हैं। यह निकटता उनके संबंधों को बाहरी परिस्थितियों के प्रति लचीला बनाती है।” रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत ने ‘नॉर्थ-साउथ’ व्यापार कॉरिडोर के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दिखाई है और इस कॉरिडोर की एक प्रमुख कड़ी चाबहार बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए निवेश जारी रखने की तत्परता व्यक्त की है।

इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे तेजी से बढ़ते भारतीय उद्योगों के कारण तांबा, यूरेनियम और दुर्लभ व महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने और बाहरी स्रोतों की सीमित संख्या पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया, “उज्बेकिस्तान के पास 32 प्रकार के खनिजों का भंडार है जो हरित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आपसी हित केवल कच्चे माल की बिक्री में नहीं है, बल्कि संयुक्त वैल्यू चेन के निर्माण में है, जिसमें भूवैज्ञानिक अन्वेषण, हरित धातुओं का प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा के लिए घटकों का उत्पादन और उर्वरकों व रासायनिक उत्पादों का निर्माण शामिल है।”

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत को अधिक स्थिर संसाधन आधार मिलेगा, जबकि उज्बेकिस्तान को पूंजी, प्रौद्योगिकी और स्थिर मांग मिलेगी। यह मॉडल न्यू उज्बेकिस्तान के मुख्य सिद्धांत के अनुरूप है।

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