29 जुलाई । भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार 2001 के 7 अरब डॉलर से करीब 14 गुना बढ़कर 98 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, संचयी निवेश भी 75 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है, जो कि टेलीकॉम, फार्मा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि पर केंद्रित है। यह जानकारी इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप फोरम (आईएईएफ) की ओर से संकलित आंकड़ों में दी गई।
अफ्रीका न्यूज एजेंसी (एएनए) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि केपटाउन शहर ने हालिया आंकड़े भी पेश किए हैं। शहर की मेयर समिति में आर्थिक विकास के सदस्य जेम्स वोस के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में अफ्रीका और भारत के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर से अधिक रहा, जबकि 2019-20 में यह 56 अरब डॉलर था।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि “आने वाली और बड़ी प्रगति की सिर्फ शुरुआत” होनी चाहिए।
एएनए की रिपोर्ट के अनुसार, 13 से 15 जुलाई, 2026 के दौरान केपटाउन में आयोजित छठे ‘इंडिया-अफ्रीका एंटरप्रेन्योरशिप एंड इन्वेस्टमेंट समिट’ में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में पूर्ण सत्र, लक्षित कारोबारी बैठकें और विभिन्न कार्य समूहों का आयोजन किया गया। इन कार्य समूहों में क्षेत्रीय निवेश, डिजिटल कौशल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि, उप-सहारा अफ्रीका में फिनटेक इकोसिस्टम का विकास तथा अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र के तहत व्यापार एकीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
आईएईएफ के अनुसार, भारत और अफ्रीका की संयुक्त आर्थिक क्षमता लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर है। दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई), फिनटेक, जलवायु प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान आईएईएफ ने अफ्रीका के भारतीय मूल के 100 सबसे प्रभावशाली उद्यमियों की सूची भी जारी की। इस सूची में केन्या, घाना, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी), बोत्सवाना, मेडागास्कर और मॉरीशस सहित कई देशों के उद्यमी शामिल हैं। इनमें डीआरसी में विनमार्ट और सोमिका ग्रुप के चेयरमैन चेतन चुग भी शामिल हैं।
यह पहल अफ्रीका में बसे भारतीय मूल के लगभग 30 लाख लोगों (भारतीय प्रवासी समुदाय) को रेखांकित करती है। आईएईएफ के अनुसार, यह समुदाय दोनों क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक रूप से व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
केपटाउन में निजी क्षेत्र की अगुवाई में आयोजित यह सम्मेलन नई दिल्ली में 28 से 31 मई, 2026 के दौरान आयोजित चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के लगभग छह सप्ताह बाद हुआ। इस अंतर-सरकारी बैठक में भारतीय अधिकारियों ने बताया था कि 1996 से 2025 के बीच अफ्रीका में भारत का कुल निवेश लगभग 80 अरब डॉलर रहा है। इसके अलावा, भारत ने 41 अफ्रीकी देशों को 10 अरब डॉलर से अधिक की 190 से अधिक रियायती ऋण सुविधाएं (लाइन ऑफ क्रेडिट) भी प्रदान की हैं। इनका उपयोग पेयजल, कृषि, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा बताए गए 80 अरब डॉलर के निवेश और आईएईएफ द्वारा केवल निजी निवेश के लिए बताए गए इससे कहीं अधिक बड़े आंकड़े के बीच का अंतर यह दर्शाता है कि सार्वजनिक वित्तपोषण, रियायती ऋण सुविधाओं और कई दशकों में हुए निजी निवेश को मिलाकर बने भारत-अफ्रीका आर्थिक संबंधों का सटीक आकलन करना आसान नहीं है।


Leave feedback about this