April 22, 2026
National

झारखंडः द्वितीय विश्व युद्धकालीन 227 किलो का बम निष्क्रिय, लोगों ने ली राहत की सांस

Jharkhand: 227 kg World War II bomb defused, people heave a sigh of relief

22 अप्रैल । झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपोड़ा-नागुड़साई इलाके में स्वर्णरेखा नदी किनारे मिले लगभग 227 किलोग्राम वजनी विशाल बम को भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम ने बुधवार को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया।

सेना की त्वरित और सटीक कार्रवाई से एक संभावित बड़े खतरे को समय रहते टाल दिया गया है। इस ऑपरेशन के बाद पिछले कई दिनों से दहशत के साये में जी रहे स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। सेना की टीम ने ऑपरेशन से पहले लगातार दो दिनों तक बम का गहन तकनीकी निरीक्षण किया। इस दौरान उसकी बनावट, विस्फोटक क्षमता और आसपास के इलाके पर संभावित असर का विस्तार से आकलन किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को सेना और पुलिस ने घेराबंदी कर छावनी में तब्दील कर दिया था।

आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी और आसपास के गांवों में कड़ी निगरानी रखी गई। बुधवार को सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विशेषज्ञों की देखरेख में बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया। प्रशासन और ग्रामीणों ने सेना की त्वरित और सटीक कार्रवाई की सराहना की है। करीब एक सप्ताह पहले स्वर्णरेखा नदी में बालू खुदाई के दौरान इस बम के मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।

मिसाइलनुमा इस बम के साथ कुछ युवकों की तस्वीरें वायरल होने के बाद प्रशासन अलर्ट हुआ और तत्काल सेना की बम निरोधक टीम को बुलाया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। ऑपरेशन के तहत बम को निष्क्रिय करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई। जेसीबी की मदद से गहरा गड्ढा तैयार कर सैकड़ों बालू भरी बोरियों से सुरक्षा घेरा बनाया गया और लगभग डेढ़ किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया गया था। पुलिस, झारखंड जगुआर,अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें एंबुलेंस के साथ मौके पर तैनात रहीं।

इससे पहले 16 अप्रैल को भी इसी क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के किनारे द्वितीय विश्व युद्ध काल के दो जिंदा बम मिलने से सनसनी फैल गई थी। पिछले एक महीने के भीतर इस इलाके में युद्धकालीन विस्फोटक मिलने की यह तीसरी घटना थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, गर्मी में नदी का जलस्तर घटने से रेत में दबे पुराने बम बाहर आने लगे हैं। इससे पहले मार्च महीने में भी इसी क्षेत्र से दो शक्तिशाली बम बरामद किए गए थे, जिन्हें सेना ने काफी मशक्कत के बाद निष्क्रिय किया था।

लगातार मिल रहे विस्फोटकों को लेकर ग्रामीणों में अब भी चिंता बनी हुई है। लोगों ने प्रशासन से पूरे इलाके की आधुनिक तकनीक से जांच कराने की मांग की है, ताकि जमीन के नीचे दबे अन्य संभावित बमों का पता लगाया जा सके और भविष्य में किसी बड़े खतरे से बचा जा सके।

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