भागलपुर में सुल्तानगंज के श्रावणी मेले में कांवड़ियों को सात्विक भोजन के लिए ‘जीविका दीदी की रसोई’ भी कार्यरत है। यह रसोई मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है। यहां रोजाना लगभग 1000 से ज्यादा कांवड़ियां भोजन करते हैं। महीने भर चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान 100 से अधिक महिलाओं (जीविका दीदी) को रोजगार मिला है।
नमामि गंगे घाट पर जीविका का संचालन कर रहे मैनेजर सौरभ कुमार ने आईएएनएस बताया कि यहां 100 से ज्यादा जीविका दीदी को रोजगार मिला है। इस एक माह के श्रावणी मेले से एक जीविका दीदी की 8 से 10 हजार रुपये की कमाई हो जाएगी। मैनेजर ने बताया कि 30 लाख रुपये की आमदनी की संभावना है।
सौरभ कुमार ने कहा, “जीविका दीदी की रसोई में काम करने वाली महिलाएं सुल्तानगंज के आस-पास के इलाकों की रहने वाली हैं। इनमें से कई महिलाएं पहले कोई काम नहीं करती थीं। जब उन्हें जीविका के जरिए इस मौके के बारे में पता चला, तो उन्हें रोजगार मिल गया।”
‘जीविका दीदी की रसोई’ में एक काउंटर संभालने वाली रितु देवी ने कहा कि इस पहल से काफी मुनाफा हुआ है और साथ ही उन महिलाओं को भी रोजगार के मौके मिले हैं जो पहले बेरोजगार थीं।
वहीं दूसरी ओर, बाबा नगरी भक्ति और आस्था में डूबी रही। जैसे ही सुबह 4:08 बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के दरवाजे खुले, देवघर “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से गूंज उठा।दिन भर में 2,26,747 श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को पवित्र जल चढ़ाया और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह खुलने से पहले पुजारी गौरव झा ने रोजाना होने वाली सरदार पूजा की।
बिहार सरकार, ‘बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी’ के जरिए ग्रामीण गरीबों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए विश्व बैंक की मदद से ‘बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रोजेक्ट’ (जिसे आम तौर पर ‘जीविका’ के नाम से जाना जाता है) लागू कर रही है। बाद में ‘बिहार कोसी बाढ़ रिकवरी प्रोजेक्ट’ के ‘आजीविका बहाली और सुधार’ वाले हिस्से को भी ‘जीविका’ पहल के तहत शामिल कर लिया गया।


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