10 जून । तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश ने बुधवार को कहा कि पार्षद आर. सुगाथन से जुड़े मामले में भाजपा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सुगाथन के आवास पर गिरफ्तारी अभियान के दौरान अनावश्यक तनाव का माहौल पैदा किया।
मेयर राजेश ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई जरूरत से ज्यादा आक्रामक थी और इसे टाला जा सकता था। पुलिस अधिकारी ने सिर्फ हंगामा खड़ा करने के लिए हवा में गोली चलाई। पुलिस ने केएएपीए मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
मंगलवार रात वजूट्टुकोनम वार्ड के भाजपा पार्षद सुगाथन को उनके घर पर हुए हंगामे के बाद वट्टियूरकावु पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और सेंट्रल जेल भेज दिया।
वह केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत जेल भेजे जाने वाले पहले मौजूदा पार्षद हैं। जिला कलेक्टर ने पहले ही केएएपीए के तहत सुगाथन को प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) में रखने का आदेश दिया था।
उन्हें गिरफ्तार करने आए पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने के आरोप में उनके खिलाफ एक नया मामला भी दर्ज किया गया है। यह गिरफ्तारी दो महीने पहले मंदिर के एक उत्सव के दौरान हुए झगड़े के बाद हत्या की कोशिश के आरोप वाले मामले के सिलसिले में की गई थी।
सुगाथन ने इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उन्हें 7 जून तक जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। सुगाथन तय समय सीमा के भीतर पेश नहीं हुए और कहीं नहीं मिले।
पुलिस ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि सुगाथन वजूट्टुकोनम स्थित अपने घर लौट आए हैं, जिसके बाद वट्टियूरकावु सीआई विपिन के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
हालांकि उनके समर्थक घर के बाहर जमा हो गए और पुलिस टीम को घेर लिया, जिससे वे सुगाथन को साथ नहीं ले जा सके। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब पुलिस अधिकारियों को भीड़ के विरोध का सामना करना पड़ा।
बाद में सीआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाई, जिसके बाद सुगाथन को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तारी की कोशिश के दौरान सुगाथन और उनके भाई ने सीआई विपिन और एसआई अभिजीत पर हमला किया।
दोनों अधिकारी घायल हो गए, हालांकि सुगाथन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और दावा किया कि वह चिकनपॉक्स का इलाज करवा रहे थे और फरार नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी महिला अधिकारी के उनके घर में घुसी और उनकी पत्नी व बेटे के साथ मारपीट की। उनकी पत्नी अश्वथी ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने सुगाथन के साथ मारपीट की, बच्चों को डराया और घर के अंदर दहशत का माहौल बना दिया।
उन्होंने दावा किया कि जब उनका आठ साल का बच्चा रोने लगा तो उसे धक्का देकर हटा दिया गया। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बल का इस्तेमाल तभी किया गया, जब पार्षद और उनके भाई ने अधिकारियों पर हमला किया और स्थिति को काबू में करने के लिए आत्मरक्षा में गोली चलाई गई।


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