N1Live National भाषा, संस्कृति और परंपरा भारत की अनूठी पहचान को समृद्ध करते हैं: हरि बाबू कंभमपति
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भाषा, संस्कृति और परंपरा भारत की अनूठी पहचान को समृद्ध करते हैं: हरि बाबू कंभमपति

Language, culture, and tradition enrich India's unique identity: Hari Babu Kambhampati

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने रविवार को लोक भवन के नए अभिषेक हॉल में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति और इसकी स्थिरता एवं प्रगति की नींव है।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक भाषा, संस्कृति, परंपरा और समुदाय विविधता में एकता की भारत की अनूठी पहचान को समृद्ध करते हैं। राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के त्योहारों को मनाना, विभिन्न भाषाओं को सीखना और विविध परंपराओं को अपनाना लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने में सहायक होता है।

उन्होंने कहा कि यह भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच गहरी सांस्कृतिक समझ और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देता है।

इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने राज्य को भारत के सबसे जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में से एक बताया। उन्होंने साहित्य, कला, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण में पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण योगदानों पर प्रकाश डाला और कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी बताते हुए कहा कि यहीं से रवींद्रनाथ टैगोर और सत्यजीत रे जैसे महान व्यक्तित्वों का जन्म हुआ है।

डॉ. कंभमपति ने पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी प्रशंसा की, जो यहां के संगीत, रंगमंच, खानपान और त्योहारों में झलकती है। उन्होंने दुर्गा पूजा का विशेष उल्लेख किया, जिसे यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है।

ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच घनिष्ठ संबंधों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच संबंध साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। ओडिशा में रहने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने अधिक समावेशी, सामंजस्यपूर्ण और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए दोनों राज्यों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राज्यपाल की आयुक्त-सह-सचिव डॉ. रूपा रोशन साहू ने स्वागत भाषण दिया। ओडिशा में रह रहे पश्चिम बंगाल के निवासियों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उत्सव में रंग भर दिया।

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