July 21, 2026
National

नक्सल प्रभावित चुरचू में महिलाओं की बदली तकदीर, लाह की चूड़ियां बनाकर बन रहीं ‘लखपति दीदी’

Lives of women transformed in Naxal-affected Churchu; making lac bangles helps them become ‘Lakhpati Didis’.

कभी नक्सल गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाला हजारीबाग जिले का चुरचू प्रखंड अब महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। यहां की महिलाएं लाह की चूड़ियां बनाकर न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि हर महीने हजारों रुपए की कमाई कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

चुरचू प्रखंड के कजरी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक लाह कला को रोजगार का मजबूत माध्यम बना लिया है। ‘चुरचू नारी ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ से जुड़ी करीब 40 महिलाएं लाह की चूड़ियां तैयार कर रही हैं। इन महिलाओं का कहना है कि इस काम से उन्हें हर महीने करीब 70 से 80 हजार रुपए तक की आय हो रही है।

महिलाओं ने बताया कि करीब सात साल पहले उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी। पहले जहां कई महिलाओं को घर की जिम्मेदारियों से बाहर निकलने का अवसर नहीं मिलता था, वहीं अब वे प्रशिक्षण लेकर अपनी पहचान बना रही हैं। उनके बनाए उत्पाद हजारीबाग के अलावा देश के कई राज्यों तक पहुंच रहे हैं।

लाह उत्पादन के मामले में झारखंड देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। यहां तैयार होने वाला लाह देश-विदेश में भेजा जाता है। लाह का उपयोग केवल चूड़ियां बनाने में ही नहीं, बल्कि कॉस्मेटिक, ज्वेलरी और दवा उद्योग में भी किया जाता है। इसी पारंपरिक कला को महिलाओं ने आधुनिक डिजाइन और बेहतर बाजार से जोड़कर आय का जरिया बनाया है।

लाह की चूड़ी बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत वाली होती है। सबसे पहले लाह को गर्म करके पिघलाया जाता है। इसके बाद उसे आकार देकर चूड़ी तैयार की जाती है। फिर उसमें अलग-अलग रंग मिलाए जाते हैं और ग्राहकों की पसंद के अनुसार मोती, शीशे, राइनस्टोन और अन्य सजावटी सामग्री लगाकर आकर्षक बनाया जाता है।

चुरचू नारी ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की कलाकार ममता देवी ने बताया कि वर्ष 2016 में इस पहल की शुरुआत हुई थी। महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर लाह की चूड़ियां बनाना सीखा और धीरे-धीरे यह काम रोजगार का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ चूड़ी केंद्र में काम कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।

कंपनी के कोऑर्डिनेटर संदीप मुर्मु ने बताया कि केंद्र सरकार और अन्य संस्थाओं से मिली सहायता के बाद इस पहल को आगे बढ़ाने में मदद मिली। समय के साथ समूह को पहचान और पुरस्कार भी मिले हैं। ट्रेनर संगीता देवी ने बताया कि समूह से जुड़ी करीब 40 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लगभग 15 लाख रुपए की ग्रांट भी मिली, जिससे काम को विस्तार देने में मदद मिली।

कभी जहां शाम होते ही डर का माहौल बन जाता था, आज उसी चुरचू में लाह की रंग-बिरंगी चूड़ियों की खनक महिलाओं की सफलता और बदलते भविष्य की कहानी सुना रही है। सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और महिलाओं की मेहनत ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।

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