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एलपीजी की कमी से चेन्नई में होटल उद्योग डगमगाया, सीमित मेन्यू के साथ चल रही रसोई

LPG shortage cripples Chennai's hotel industry, with kitchens operating with limited menus

12 मार्च । तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में इन दिनों कुकिंग गैस की भारी कमी ने आम जनजीवन और होटल उद्योग को मुश्किल में डाल दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई रेस्तरां, बेकरी और चाय की दुकानों को या तो अपना काम सीमित करना पड़ रहा है या फिर लकड़ी, कोयला और इलेक्ट्रिक स्टोव जैसे वैकल्पिक तरीकों से खाना बनाना पड़ रहा है।

यह संकट सिर्फ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू गैस सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस कमी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध है, जिसने ईंधन की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

भारत एलपीजी उत्पादन के लिए कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों का बड़ा हिस्सा कुवैत, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आयात करता है। मौजूदा संघर्ष के कारण इन देशों से आयात पर असर पड़ा है, जिससे कुकिंग गैस की उपलब्धता अचानक घट गई है।

केंद्र सरकार ने यह भरोसा दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद कई गैस निर्माण कंपनियों ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों का उत्पादन रोक दिया है या काफी कम कर दिया है। इसका सीधा असर चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों के होटल और खानपान व्यवसाय पर पड़ रहा है।

पिछले दो दिनों से कई रेस्तरां अपने पास बचे सीमित सिलेंडरों के सहारे ही रसोई चला रहे हैं। वहीं जिन छोटे और मध्यम स्तर के होटलों का स्टॉक खत्म हो गया है, उन्होंने फिलहाल अस्थायी रूप से दुकानें बंद कर दी हैं। जो रेस्तरां अभी खुले हैं, उन्होंने अपने मेन्यू में भी भारी कटौती कर दी है।

आमतौर पर दोपहर के भोजन में सांभर, अलग-अलग तरह की करी, मोर कुजम्बू (छाछ की ग्रेवी), रसम, पोरियाल, अवियल और पापड़ जैसे कई व्यंजन परोसे जाते हैं, लेकिन अब कई जगहों पर सिर्फ एक ग्रेवी और एक चटनी के साथ ही खाना परोसा जा रहा है।

कई रेस्तरां ने ग्राहकों को जानकारी देने के लिए बाहर नोटिस भी लगा दिए हैं कि फिलहाल सीमित मेन्यू ही उपलब्ध है। कुछ होटल ऐसे व्यंजन बना रहे हैं जिनमें कम ईंधन लगता है, जैसे टमाटर राइस, इमली राइस और लेमन राइस।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ नॉन-वेज रेस्तरां ने ऑमलेट तक बनाना बंद कर दिया है, जबकि चाय की कई दुकानों ने वड़ा और भज्जी जैसे स्नैक्स तैयार करना भी रोक दिया गया है।

शहर के नुंगमबक्कम और एगमोर जैसे इलाकों के कई लोकप्रिय रेस्तरां अब कोयला, लकड़ी या इलेक्ट्रिक स्टोव पर खाना बना रहे हैं। इससे अचानक जलाऊ लकड़ी की मांग बढ़ गई है, जिसके कारण कीमतों में भी तेजी आई है। होटल मालिकों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में एक टन लकड़ी की कीमत 500 से 1,000 रुपए तक बढ़ गई है।

इस गैस संकट का असर शैक्षणिक संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के कई कॉलेज और विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में गैस सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। इसके चलते कुछ संस्थानों ने अस्थायी रूप से हॉस्टल बंद करने और कक्षाएं ऑनलाइन चलाने का फैसला किया है।

चेन्नई के एक निजी मेडिकल कॉलेज ने घोषणा की है कि 12 मार्च से 25 मार्च तक नियमित कक्षाएं स्थगित रहेंगी और पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी। कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से कमरे खाली करने को कहा गया है, जबकि शिक्षक और कर्मचारी पहले की तरह कैंपस आते रहेंगे।

रेस्तरां मालिकों का कहना है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो शहर के कई होटल और खानपान प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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