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मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली में पुरानी इमारतों की नियमित जांच करने की मांग की

Maulana Sajid Rashidi demanded regular inspection of old buildings in Delhi

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर पुरानी इमारतों की नियमित जांच की मांग की और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नए निकाहनामा फॉर्मेट को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। इसके साथ ही उन्होंने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ढहाए जाने को लेकर जिला अदालत को असली दोषी ठहराया।

सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया और दूसरे बड़े विश्वविद्यालयों समेत ऐसी सभी पुरानी इमारतों की नियमित जांच होनी चाहिए। खराब इमारतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि एक बड़ा हादसा हुआ और लोग मलबे में फंसे हुए हैं। मैं दुआ करता हूं कि वे सुरक्षित बाहर निकल आएं। सरकार को जांच करनी चाहिए, खराब इमारतों की पहचान करनी चाहिए, और उन्हें मजबूत बनाना चाहिए। पुरानी इमारतों से खतरा बना रहता है। इससे जानमाल का नुकसान होता है। सरकार को उन पर ध्यान देना चाहिए।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नए निकाहनामा फॉर्मेट को लेकर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “वक्फ बोर्ड जो निकाहनामा ला रहा है, वह उसके अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। वक्फ बोर्ड सिर्फ वक्फ प्रॉपर्टी के लिए है। प्रॉपर्टी की देखभाल करना और उन्हें किराए पर देना बोर्ड की जिम्मेदारी है। निकाहनामा का इससे क्या लेना-देना है? वे किस कानून के तहत निकाहनामा लाना चाहते हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी बात यूसीसी में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि लड़की को अपने पिता की प्रॉपर्टी पर पूरा हक होगा। यह कहां लिखा है? उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के खिलाफ कई केस हैं। उन्होंने वक्फ प्रॉपर्टी से करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए हैं। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि इसकी जांच होनी चाहिए।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर स्थित मस्जिद को ढहाए जाने को लेकर मौलाना साजिद रशीदी ने रविवार को आरोप लगाया कि इस मामले में असली दोषी जिला अदालत है, जिसने मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और बेहद जल्दबाजी में अपना आदेश पारित कर दिया। रशीदी ने कहा, “जिस तरह से सहारनपुर में कलेक्ट्रेट वाली मस्जिद को पूरी तरह से तानाशाही, धमकी और मनमानी के जरिए ढहाया गया है, वह संविधान, देश के घोषणापत्र और कानून के शासन पर एक बड़ा दाग है।”

रशीदी ने जमीन के स्वामित्व को लेकर आए निष्कर्ष पर विवाद जताया और दावा किया कि मुस्लिम स्वामित्व स्थापित करने वाले दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “वह मस्जिद और वह स्थल, बल्कि कलेक्ट्रेट खुद भी याकूब खान और वहीद खान नाम के मुसलमानों की जमीन पर बना हुआ है। सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए जाने के बावजूद, जिला अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और उन्हें जांचना या उन पर विचार-विमर्श करना जरूरी नहीं समझा, और बेहद जल्दबाजी में विध्वंस का आदेश जारी कर दिया।”

उन्होंने कहा, “मुसलमानों के पास अभी भी अपील दायर करने और उच्च न्यायालय जाने के लिए 22 दिन बाकी थे, फिर भी कोई समय नहीं दिया गया। आधी रात को इंटरनेट सेवाओं को बंद करके और विभिन्न समुदाय के नेताओं को नजरबंद करके जानबूझकर मस्जिद को गिरा दिया गया, ताकि भारतीय जनता पार्टी इसका राजनीतिक फायदा उठा सके और अन्य राजनीतिक दलों को भी इस मामले का राजनीतिकरण करने का अवसर मिल सके।”

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