August 16, 2022
National

अगर बनिहाल में डॉपलर रडार काम करता तो अमरनाथ त्रासदी टल सकती थी!

नई दिल्ली,  केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बनिहाल में घोषणा के दो साल से अधिक समय के बाद भी डॉपलर रडार अभी भी काम नहीं कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण लुप्त कड़ी है, जो शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ तीर्थ स्थल पर एक दर्जन से अधिक लोगों की दुखद मौतों को रोकने में मदद कर सकती थी।

अमरनाथ के पवित्र गुफा मंदिर में शुक्रवार शाम भारी बारिश के कारण आई बाढ़ में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य के बह जाने की आशंका है।

आईएमडी ने केवल ‘बहुत हल्की बारिश’ की भविष्यवाणी की थी और बाद में कहा कि इस तरह की स्थानीय भारी बारिश की घटनाएं नियमित रूप से तब भी होती हैं, जब अधिकारी इसे बादल फटने की घटना का नाम देते हैं। असुविधा खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।

डॉपलर रडार एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) को बनिहाल में 100 किमी के क्षेत्र में रडार की सीमा में बादलों और वर्षा का अधिक सटीक आकलन देता है।

बनिहाल के लिए प्रस्तावित यह डॉपलर रडार एक एक्स-बैंड रडार है, जिसे पहाड़ी इलाकों में वायुमंडलीय परिवर्तनों तक स्पष्ट पहुंच प्राप्त करने के लिए एक उच्च बिंदु (हाई प्वाइंट) पर स्थापित किया जाना है। यह स्थान डिफेंस जियोइनफॉरमैटिक्स रिसर्च एस्टाब्लिशमेंट (डीजीआरई) के अधीन है। इसे काफी ऊंचाई पर, किसी भी गांव से दूर स्थापित किया जाना है।

आईएमडी के एक वैज्ञानिक ने कहा, “यही कारण है कि पहुंच के मुद्दे भी हैं। साथ ही, इसकी घोषणा पहले की जा सकती है, लेकिन खरीद प्रक्रिया एक लंबी प्रक्रिया है। इसमें समय लगता है।”

रडार से पूरी पीर पंजाल रेंज को कवर करने की उम्मीद है और एक बार इसके कार्यात्मक होने के बाद, यह 270 किलोमीटर श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग, अमरनाथ यात्रियों द्वारा उपयोग की जाने वाली मुख्य सड़क के लिए बेहतर मौसम पूवार्नुमान की भविष्यवाणी करने में भी मददगार होगा।

आईएमडी का अपर एयर इंस्ट्रूमेंटेशन डिवीजन फाइनल टच देने पर काम कर रहा है और फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है।

आईएमडी के महानिदेशक (मौसम विज्ञान) मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, “काम जारी है।”

आईएमडी के पास पहलगाम की ओर और बालटाल की ओर से यात्रा मार्ग के साथ-साथ स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) हैं। हालांकि, वे केवल वास्तविक मौसम के लिए डेटा देते हैं, यानी, जो हुआ है। उदाहरण के तौर पर हल्की बारिश, गरज, भारी बारिश, या बर्फ गिरने आदि के लिए यह काम आता है। वह डेटा लंबी अवधि में उपयोगी है।

डॉपलर रडार से डेटा, क्योंकि यह वास्तविक समय का आकलन देता है, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन कर्मियों के लिए मददगार है, विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों के लिए, क्योंकि आगामी चरम मौसम की घटना के बारे में अग्रिम जानकारी घातक घटनाओं को रोक सकती है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के मौसम की निगरानी रखने वाले श्रीनगर में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख सोनम लोटस ने कहा, “रडार पहले से ही स्थापित है और आने वाले सप्ताह में इसे चालू कर दिया जाएगा।”

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