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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता दीपक सिंगला की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने ईडी को उच्च न्यायालय के 9 सितंबर के आदेश के खिलाफ सिंगला की याचिका पर जवाब देने को कहा। वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने सिंगला का प्रतिनिधित्व किया, जिन्हें ईडी ने 18 मई को गिरफ्तार किया था।

आम आदमी पार्टी के नेता पर विदेशी साख पत्रों में धोखाधड़ी से वृद्धि करने का आरोप है, जिससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को 155.21 करोड़ रुपये का अनुचित नुकसान हुआ है।

सीबीआई ने 2018 में पूर्व ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी के माध्यम से और निजी व्यक्तियों तथा एक बैंक अधिकारी की मिलीभगत से, बैंक के फिनाकल सिस्टम में संबंधित प्रविष्टियाँ किए बिना, अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों के जरिए विदेशी साख पत्रों को धोखाधड़ी से बढ़ाया, जिससे बैंक को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का कथित गलत नुकसान हुआ।

बाद में पता चला कि कंपनी के खिलाफ मूल बकाया राशि 239.46 करोड़ रुपये थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 10 अगस्त, 2020 को आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की। जांच में पाया गया कि विदेशी साख पत्रों का मूल्य उनके मूल मूल्य 21.47 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये कर दिया गया था और आरोप लगाया गया था कि धन की हेराफेरी के लिए बिल ऑफ एंट्री, बिल ऑफ लैडिंग और अन्य आयात दस्तावेजों में जालसाजी की गई थी।

ईडी की दूसरी पूरक अभियोग शिकायत में सिंगला को आरोपी के रूप में नामित किया गया था, जिसमें अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि उसने जानबूझकर मुख्य आरोपी को अपने व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से अपराध की आय को छिपाने, कई स्तरों में जमा करने और स्थानांतरित करने में सहायता की थी।

उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष ने याचिकाकर्ता को महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध संस्थाओं के साथ उसके जुड़ाव, सौरभ एंटरप्राइजेज और जय दुर्गा एंटरप्राइजेज के माध्यम से कथित रूप से धन के प्रवाह और मुख्य आरोपी से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन के हस्तांतरण से संबंधित भूमिका सौंपी है।

ईडी द्वारा प्रस्तुत सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता को सौंपी गई भूमिका की जांच व्यापक साजिश और कथित तौर पर अपराध की आय के मनी लॉन्ड्रिंग के संदर्भ में की जानी चाहिए। ( पीटीआई के साथ)

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