गर्भाधान पूर्व एवं प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के तहत गठित कांगड़ा जिला सलाहकार समिति और जिला उपयुक्त प्राधिकरण ने स्वास्थ्य अधिकारियों को जिले भर के क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित रूप से अचानक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है ताकि अवैध लिंग निर्धारण को रोका जा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश कुमार भारती की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये निर्देश जारी किए गए। समिति ने विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त 16 आवेदनों पर विचार किया, जिनमें से 12 को मंजूरी दी गई। शेष आवेदकों को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया गया। डॉ. भारती ने ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित रूप से अचानक निरीक्षण करने का निर्देश दिया। उन्होंने अन्य राज्यों की सीमा से लगे क्षेत्रों में स्थित केंद्रों की निगरानी बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान पाई गई किसी भी अनियमितता पर कानून के तहत तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए और निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएम) के कार्यालय में जमा की जानी चाहिए। सीएमओ ने सभी संबंधित केंद्रों को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले स्थानों पर “यहां भ्रूण का लिंग निर्धारण नहीं किया जाता है” संदेश वाले बोर्ड लगाने का निर्देश भी दिया।


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