7 फरवरी । केरल के वायनाड में जुलाई 2024 में आए भीषण भूस्खलन के बाद केंद्र सरकार से विशेष सहायता न मिलने को लेकर सीपीआई के राज्यसभा सदस्य पी. संदोष कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में केंद्र सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ बताया है।
पत्र में सांसद संदोष कुमार ने याद दिलाया कि 30 जुलाई 2024 को वायनाड जिले की चूरलमाला, मुंडक्कई और मेप्पाडी पंचायत के आसपास के इलाकों में विनाशकारी भूस्खलन हुआ था। इस प्राकृतिक आपदा में 400 से अधिक लोगों की जान चली गई, सैकड़ों लोग घायल हुए और हजारों परिवार बेघर हो गए। इसके अलावा घरों, आजीविका के साधनों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिसकी कुल क्षति कई सौ करोड़ रुपए आंकी गई।
उन्होंने कहा कि यह केरल के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी, जिसमें केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तत्काल, बिना शर्त और पर्याप्त सहायता की जरूरत थी। हालांकि, केरल सरकार, संसद में उनके स्वयं के हस्तक्षेप और राज्य के कई सांसदों की अपीलों के बावजूद, केंद्र सरकार ने कोई विशेष पैकेज या अनुदान सहायता देने से इनकार कर दिया। सांसद ने इसे पीड़ितों के प्रति चौंकाने वाली असंवेदनशीलता बताया।
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि केंद्र से मदद न मिलने के बावजूद केरल की एलडीएफ सरकार एकजुट और दृढ़ रही। राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति के बावजूद सामूहिक प्रयास और जन सहयोग से सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का काम किया गया। उन्होंने बताया कि स्थायी मॉडल घरों और सभी बुनियादी सुविधाओं, सामुदायिक ढांचे और आजीविका सहायता से लैस पुनर्वास कॉलोनियों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और डेढ़ साल के भीतर इन्हें प्रभावित परिवारों को सौंपा जा रहा है।
संदोष कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एलडीएफ नेताओं के साथ इन पुनर्वास कॉलोनियों का दौरा किया है और उनकी तस्वीरें संदर्भ के लिए पत्र के साथ संलग्न की गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मानवीय संकट के दौरान केंद्र सरकार द्वारा केवल ऋण के रूप में सहायता देना भाजपा की राजनीति की सीमाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केरल द्वारा भाजपा के एजेंडे को लगातार नकारे जाने के कारण आपदा और जनता के दुख का इस्तेमाल राज्य को आर्थिक रूप से दबाने के लिए किया गया।
सीपीआई सांसद ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि केंद्र सरकार की उदासीनता के बावजूद केरल की जनता एलडीएफ के नेतृत्व में एकजुट, मजबूत और आत्मनिर्भर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था तभी सफल हो सकती है जब आपदा राहत राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि संवैधानिक कर्तव्य के तहत दी जाए। सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री और एनडीए सरकार से अपील की कि वे इस पक्षपातपूर्ण रवैये पर गंभीरता से विचार करें और निष्पक्षता, संघीय जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का पालन करें।

