August 20, 2026
National

पद्मश्री कन्हाई : कैनवास की सोने और कीमती रत्नों से सजावट, कृष्ण भक्ति की अनूठी मिसाल

Padma Shri Kanhai: Adorning the canvas with gold and precious gems—a unique example of devotion to Krishna.

जब किसी चित्र में रंगों के साथ सोने की चमक दिखाई दे और उसमें राधा-कृष्ण की छवि नजर आए, तो उसे देखकर नजरें ठहरना लाजिमी है। ऐसी ही अनोखी कला के लिए मशहूर हैं वृंदावन के पद्मश्री कृष्ण कन्हाई। उनकी पेंटिंग्स में सिर्फ रंग और आकृतियां नहीं होतीं, बल्कि ब्रज की संस्कृति, कृष्ण भक्ति और भारतीय कला की खूबसूरती एक साथ दिखाई देती है। खास बात यह है कि वे अपनी कई कलाकृतियों में शुद्ध सोने और कीमती रत्नों का इस्तेमाल करते हैं।

कृष्ण कन्हाई का जन्म 21 अगस्त 1961 को उत्तर प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल वृंदावन, मथुरा में हुआ। कला उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता और गुरु पद्मश्री कन्हाई चित्रकार खुद राधा-कृष्ण की पेंटिंग्स के लिए जाने जाते थे। बचपन से ही कृष्ण कन्हाई का झुकाव चित्रकारी की ओर था। पिता ने उन्हें कला की बारीकियां सिखाईं और साथ ही अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।

किशोरावस्था में ही उन्होंने लोक विषयों पर चित्र बनाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी एक अलग शैली विकसित की। उनकी कला में पारंपरिक ब्रज संस्कृति के साथ आधुनिक सोच का मेल दिखाई देने लगा। इसी वजह से उन्हें यमुना घाट पेंटिंग शैली को लोकप्रिय बनाने वाले प्रमुख कलाकारों में गिना जाता है।

कृष्ण कन्हाई की पहचान सबसे ज्यादा उनकी राधा-कृष्ण आधारित कलाकृतियों से बनी। उन्होंने राधा-कृष्ण की प्रेम कथाओं और अलग-अलग मुद्राओं को कैनवास पर उतारा, लेकिन उनका अंदाज बिल्कुल अलग रहा। पारंपरिक चित्रों को उन्होंने आधुनिक और आकर्षक रूप दिया। उनकी पेंटिंग्स में कहीं कृष्ण बांसुरी बजाते नजर आते हैं, तो कहीं राधा-कृष्ण की प्रेममयी छवि मन मोह लेती है। सोने की चमक और बारीक काम इन चित्रों को और खास बना देता है।

अपने लंबे करियर में कृष्ण कन्हाई ने 5,000 से ज्यादा पेंटिंग्स बनाई हैं। इनमें करीब 800 पोर्ट्रेट, लगभग 700 समकालीन पेंटिंग्स और 3,500 से ज्यादा गोल्ड पेंटिंग्स शामिल हैं। उन्होंने सिर्फ धार्मिक विषयों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि देश की कई बड़ी हस्तियों के पोर्ट्रेट भी बनाए।

उनकी बनाई पेंटिंग्स में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित कई प्रमुख हस्तियों के चित्र शामिल हैं। उन्होंने अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के भी पोर्ट्रेट बनाए हैं। कृष्ण कन्हाई की कला को देश के सबसे प्रतिष्ठित स्थानों में भी जगह मिली। उन्होंने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आदमकद चित्र बनाया, जिसे संसद के केंद्रीय कक्ष में लगाया गया।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह पर सरदार वल्लभभाई पटेल का आदमकद चित्र भी कृष्ण कन्हाई ने बनाया, जिसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में स्थापित किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर कृष्ण कन्हाई ने राज्य के प्रमुख नेताओं के 59 पोर्ट्रेट बनाए। इनमें अलग-अलग समय के 22 मुख्यमंत्री और विधानसभा के 20 पूर्व एवं वर्तमान अध्यक्षों के चित्र शामिल हैं। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर और विधान परिषद के सभापतियों के भी चित्र बनाए।

उनकी कला भारत तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के पोर्ट्रेट भी बनाए। ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य जो जॉनसन का चित्र भी उन्होंने बनाया है।

कृष्ण कन्हाई के कला के क्षेत्र में योगदान को कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें पद्मश्री प्रदान किया। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय कालिदास सम्मान, यश भारती सम्मान, राजा चक्रधर सम्मान, ब्रज रत्न, ब्रज भूषण, ब्रज विभूति और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सम्मान जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

खास बात यह भी है कि कृष्ण कन्हाई और उनके पिता कन्हाई चित्रकार, दोनों को पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। कला की दुनिया में पिता-पुत्र की यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है।

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