पीजीआईएमएस रोहतक के विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्य के लिए नियुक्त कर्मचारियों को अब अपना मौजूदा कार्य पूरा करने से पहले संस्थान के भीतर किसी अन्य परियोजना में स्थानांतरित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
परियोजना कर्मचारियों द्वारा अपने कार्यभार के बीच में ही अन्य परियोजनाओं में चले जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए, पीजीआईएमएस अधिकारियों ने प्रत्येक उम्मीदवार के लिए आवेदन पत्र के साथ एक औपचारिक वचन पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया है, जिसमें साक्षात्कार के समय यह पुष्टि करनी होगी कि वह वर्तमान में संस्थान के भीतर किसी अन्य परियोजना या योजना के तहत काम नहीं कर रहा है।
अधिकारियों ने सभी विभागाध्यक्षों (एचओडी), प्रधान अन्वेषकों (पीआई) और परियोजना प्रभारी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीजीआईएमएस में चल रही किसी भी परियोजना में सक्रिय रूप से लगे किसी भी उम्मीदवार को किसी अन्य परियोजना में नियुक्ति के लिए तब तक विचार न किया जाए जब तक कि उम्मीदवार ने मौजूदा कार्य को औपचारिक रूप से पूरा न कर लिया हो।
यह निर्देश अधिकारियों के इस अवलोकन के बाद जारी किया गया है कि एक परियोजना या योजना के तहत संविदा आधार पर काम कर रहे कई परियोजना कर्मचारी और आवेदक बाद में संस्थान के भीतर अन्य परियोजनाओं में शामिल होने के लिए अपना कार्यभार छोड़ देते हैं। पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल द्वारा हाल ही में जारी एक कार्यालय आदेश के अनुसार, इस तरह की प्रथा चल रहे शोध कार्य की निरंतरता, प्रगति और समय पर पूर्ण होने को प्रभावित करती है।
यह आदेश सभी विभागाध्यक्षों, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के प्रभारी वरिष्ठ प्रोफेसर, सभी प्रमुख अन्वेषकों और चल रही परियोजनाओं के प्रभारी अधिकारियों, वित्तीय सलाहकार और चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय को भेज दिया गया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
निर्देशों की पुष्टि करते हुए, डॉ. सिंघल ने ह कदम संविदात्मक शोध कर्मचारियों के अंतर-परियोजना आवागमन के कारण होने वाली बाधाओं को रोकने और संस्थान में किए जा रहे शोध कार्य में निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया था। उन्होंने आगे कहा, “कर्मचारियों के तबादलों से समय की बर्बादी होती है और परियोजना गतिविधियां ठप्प हो सकती हैं। इससे अधिकारियों को उसी उद्देश्य के लिए संविदा कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ती है।”
डॉ. सिंघल ने कहा, “पीजीआईएमएस के विभागों को केंद्र और राज्य सरकार, आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों से विभिन्न परियोजनाएं प्राप्त होती हैं। इन परियोजनाओं की अवधि आम तौर पर एक से तीन वर्ष होती है। संबंधित विभाग को निर्धारित समय के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती करनी होती है, और भर्ती किए गए कर्मचारियों को अक्सर परियोजना के अगले चरण में जाने से पहले विशेष प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह नई दिशा न केवल परियोजनाओं के बीच में रुकने से रोकेगी, बल्कि कर्मचारियों के अचानक स्थानांतरण के कारण होने वाले बहुमूल्य समय के नुकसान को भी रोकेगी।”


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