14 मई । देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। रानी बाग इलाके में चलती बस के अंदर एक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है।
बताया जा रहा है कि करीब 30 वर्षीय महिला को रात के समय टाइम पूछने के बहाने बस में बैठाया गया, जिसके बाद बस के अंदर उसके साथ करीब दो घंटे तक दरिंदगी की गई। आरोप है कि बस करीब सात किलोमीटर तक शहर में घूमती रही लेकिन कहीं भी पुलिस जांच या रोक-टोक नहीं हुई। बाद में पीड़िता को सड़क पर फेंक दिया गया।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि दिल्ली में एक बार फिर चलती बस में गैंगरेप हुआ है और देश ने निर्भया कांड से कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने इसे पूरे समाज के लिए कलंक बताया। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले को दो दिनों तक सार्वजनिक नहीं किया।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पुलिस घटना को दबाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि राजधानी के एक व्यस्त इलाके में दो घंटे तक बस घूमती रही और अंदर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म होता रहा, लेकिन कानून व्यवस्था पूरी तरह नदारद दिखी। सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और उपराज्यपाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन जनता की सुरक्षा से ज्यादा “रील्स और ब्रांडिंग” में व्यस्त हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्लीवासी सरकार के दर्शक नहीं बल्कि मालिक हैं और सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना होगा। मनीष सिसोदिया ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा के “चारों इंजन” फेल हो चुके हैं और राजधानी में ना स्कूलों में बच्चियां सुरक्षित हैं और ना सार्वजनिक परिवहन में महिलाएं।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि निर्भया जैसी भयावह घटना की यादें फिर ताजा हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जवाबदेही निभाने के बजाय सिर्फ प्रचार और सोशल मीडिया छवि बनाने में लगी हुई है। आतिशी ने कहा कि अपराधियों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है और दिल्ली की महिलाएं भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

