प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की प्राप्ति संभव है’ के भाव को व्यक्त करते हुए ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। जीवन में वही व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, जो धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहता है।”
उन्होंने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ साझा किया, “नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति।” ‘संस्कृत सुभाषितम्’ का अर्थ है कि जो मनुष्य निरंतर प्रयत्नशील रहता है, वह समृद्धि प्राप्त करता है, किंतु जो निष्क्रिय होकर बैठा रहता है, वह प्रगति से वंचित रह जाता है। निरंतर प्रयत्न करने वाले का भाग्य भी साथ देता है, इसलिए निरंतर कर्म करते रहो और आगे बढ़ते रहो।
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के 11 साल पूरे होने पर ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया, “विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवन्नरः। सोऽध्वनः परमाप्नोति तद्विश्नोः परमं पदम्॥” सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस व्यक्ति की विवेकशील बुद्धि एक सतर्क, वैज्ञानिक सारथी के रूप में कार्य करती है और जिसका मन अनुशासित एवं नियंत्रित होता है, वह जीवन के पथ की जटिलताओं से परे जाकर अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है।
पीएम मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया के 11 सालों की सफलता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स पोस्ट’ में कहा, “डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की सफलता से भारतवर्ष को एक नई पहचान मिली है। इससे नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाकर देश को नई ऊंचाई पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति दिखती है।”
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी हर दिन एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हैं, जो हमारी संस्कृति, समाज और देश से जुड़े अलग-अलग विषयों पर आधारित होते हैं।


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