प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गुरुवार को सुभाषित शेयर किया है। उन्होंने एक संस्कृत श्लोक, “आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः। इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।” साझा किया है। जिसका हिंदी अर्थ है कि स्थिर और दृढ़ बुद्धि वाले ज्ञानीजन समय आने पर यह समझाते हैं कि बुद्धिमान लोग संकट और कठिन परिस्थितियों में भी कभी अपना उत्साह नहीं खोते।
बीते दिन बुधवार को सुभाषित शेयर करते हुए प्रधानमंत्री की ओर से संदेश दिया गया था कि सदैव परोपकार एवं कल्याणकारी कर्म ही करें। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, “एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु। प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥” इस संस्कृत श्लोक का अर्थ है, “इस संसार में मनुष्यों के जन्म की पूर्ण सार्थकता इसी में निहित है कि वे अन्य प्राणियों के प्रति अपने शारीरिक सामर्थ्य, धन-संपत्ति, बुद्धि तथा वाणी के माध्यम से सदैव परोपकार एवं कल्याणकारी कर्मों का ही सम्पादन करें।”
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक्स पर “उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” श्लोक साझा किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए। सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता न करे, बल्कि सत्य, धैर्य और आत्मगौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहे।


Leave feedback about this