December 3, 2022
Punjab

राज्यपाल-मुख्यमंत्री के बीच भिड़ंत, बगैर वीसी के चल रहा बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज

चंडीगढ़,  राज्यपाल और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के बीच बढ़ती खींचतान के बीच पंजाब का प्रतिष्ठित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज करीब तीन माह से बगैर कुलपति के चल रहा है। राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में इस महीने फरीदकोट में स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति के रूप में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ गुरप्रीत सिंह वांडर की नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। राज्यपाल ने सरकार को तीन उम्मीदवारों के पैनल के गठन का निर्देश दिया।

राज्यपाल के कदम के बाद लुधियाना में हीरो डीएमसी हार्ट इंस्टीट्यूट के मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ वांडर ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। देश के शीर्ष आथोर्पेडिक सर्जनों में से एक राज बहादुर ने 30 जुलाई को फरीदकोट में गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की यात्रा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा द्वारा अपमान करने का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद यह पद खाली हो गया था।

यात्रा के दौरान मंत्री ने जब कुलपति राज बहादुर को एक मरीज के गंदे बिस्तर पर लेटने को कहा था। राज्यपाल ने 11 अक्टूबर को एक चयन समिति द्वारा पद के लिए कम से कम तीन उम्मीदवारों के एक पैनल की मांग करके वांडर को नियुक्त करने के सरकार के फैसले को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने 30 सितंबर को वांडर को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नियुक्ति के दिन ट्वीट किया था, ”हमें उम्मीद थी कि उनके कुशल नेतृत्व में यह संस्था जनसेवा में अहम योगदान देगी।” एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि वांडर की नियुक्ति को ठुकराने के साथ राजभवन और सरकार के बीच पहले से ही चल रहा तनावपूर्ण संबंध और बिगड़ गया। अपने फैसले को सही ठहराते हुए मान ने मीडिया से कहा कि अगर वह चाहते हैं तो सरकार तीन नामों का पैनल नियुक्ति के लिए भेजेगी।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि परंपरा यह है कि राज्यपाल सरकार द्वारा प्रस्तावित नाम पर सहमति देता है। हालांकि इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि जब पूर्व कुलपति राजबहादुर को इस पद पर नियुक्त किया गया था, तब तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार ने इस पद के लिए तीन नाम भेजे थे।
इस मुद्दे पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के.एस. औलख ने कहा कि सरकार को प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी तो सरकार ने वांडर के बारे में घोषणा कैसे की।

वांडर की नियुक्ति पर फैसला राज्यपाल द्वारा मान को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी की याद दिलाने के कुछ दिनों बाद आया है, जब उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में उनके द्वारा आयोजित एक नागरिक स्वागत समारोह में भाग नहीं लिया था। अपने और सरकार के बीच कथित वाकयुद्ध का जवाब देते हुए राज्यपाल ने सरकार को याद दिलाया कि पिछले एक साल में उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला, बल्कि वह मुख्यमंत्री की तारीफ करते रहे हैं।

राज्यपाल ने एक कदम आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री को सतबीर सिंह गोसल को लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कुलपति के पद से हटाने का निर्देश देते हुए उनकी नियुक्ति को अवैध बताया। उन्होंने कहा कि गोसाल को राज्य सरकार ने यूजीसी के नियमों का उल्लंघन कर नियुक्त किया था। अपने फैसले को सही ठहराते हुए पुरोहित ने पिछले हफ्ते राजभवन में एक बातचीत में मीडिया से कहा था कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में वह अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार उनके कामकाज में दखल दे रही है। मैं अपना कर्तव्य निभाऊंगा। मैंने संविधान की रक्षा की शपथ ली है। मुख्यमंत्री को इसका एहसास होना चाहिए। मैंने उन्हें मुख्यमंत्री को पद की शपथ दिलाई।राज्यपाल पुरोहित, जो पहले चार साल तक तमिलनाडु में शीर्ष संवैधानिक पद पर थे, ने कहा कि कुलपतियों के पद 40 करोड़ से 50 करोड़ रुपये में बेचे जा रहे हैं। पुरोहित ने कहा, मैं चार साल तक तमिलनाडु का राज्यपाल रहा। वहां बहुत बुरा हुआ। तमिलनाडु में कुलपति का पद 40 करोड़ से 50 करोड़ रुपये में बेचा गया।

कुलपतियों की नियुक्ति के संबंध में चल रहे विवाद के जवाब में एक प्रसिद्ध शिक्षाविद ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए आईएएनएस से कहा कि शिक्षा को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले कुलपति को नियुक्त करने के लिए एक उच्च स्तरीय खोज समिति की नियुिक्त की जानी चाहिए। अधिकांश शिक्षाविदों का मानना है कि संवैधानिक प्रमुख और सरकार के बीच चल रहे संघर्ष के कारण बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

एक सरकारी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने तीन महीने के कार्यकाल के बाद पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में गोसाल की नियुक्ति को सुर्खियों में लाने पर आश्चर्य व्यक्त किया।

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