June 30, 2022
Punjab

Golden Temple Museum में लगाई गई पूर्व CM के हत्यारे की तस्वीर

Suicide bomber Dilawar Singh assassinated former Punjab Chief Minister Beant Singh on August 31, 1995. Singh was a Punjab Police jawan before joining a terrorist organization named Babbar Khalsa International. Portraits of Sikh terrorists including Jarnail Singh Bhindranwale and the assassins of former Prime Minister Indira Gandhi are already on display in the museum.

अमृतसर –  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा मंगलवार को स्वर्ण मंदिर के केंद्रीय सिख संग्रहालय में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे दिलावर सिंह की तस्वीर लगाई गई। दिलावर सिंह पंजाब पुलिस के उन तीन कांस्टेबलों में शामिल थे, जिन्होंने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को मारने की योजना को अंजाम दिया था। इसके अलावा SGPC ने अकाल तख्त के पूर्व प्रधान पुजारी ज्ञानी भगवान सिंह की भी तस्वीर लगाई है।

कौन थे दिलावर सिंह क्यों और कैसे की थी मंख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या ?

आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह ने 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी। बब्बर खालसा इंटरनेशनल नाम के एक आतंकी संगठन में शामिल होने से पहले सिंह पंजाब पुलिस के जवान थे। दिलावर सिंह ने अपनी कमर के चारों ओर विस्फोटकों की एक बेल्ट बांध दी थी, जिससे एक धमाका हुआ था और फिर मौके पर ही बेअंत सिंह की मौत हो गई थी।

SGPC ने उनके बलिदान को सम्मानित करने के लिए उनकी तस्वीर को संग्रहालय में जगह दी है।

एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह ने कहा कि “उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए, दिलावर सिंह और ज्ञानी भगवान सिंह की तस्वीरें सिख संग्रहालय में प्रदर्शित किए गए हैं। ‘शहीद भाई दिलावर सिंह ने उस समय सिखों के खिलाफ किए गए अत्याचारों और घोर मानवाधिकार उल्लंघनों को खत्म कर दिया था। गुरु के आशीर्वाद के बिना आत्म बलिदान का निर्णय संभव नहीं है और जब भी समुदाय पर अत्याचार किया गया, सिखों ने हमेशा बलिदान देकर इतिहास बनाया है।” प्रधान ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह ने कहा कि “सिख समुदाय हमेशा उन लोगों को याद करता है जिन्होंने इसके लिए बलिदान दिया और सिख धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान केंद्रीय सिख संग्रहालय में उनके तस्वीरों को प्रदर्शित करके किया जाता है।”

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