4 फरवरी । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की ‘किताब’ को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे।
राहुल गांधी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “वे कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही वह किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह मिस्टर नरवणे की किताब है। यह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे कोट नहीं कर सकता हूं।”
किताब के हवाले से कांग्रेस सांसद ने कहा, “इसमें एक लाइन प्रमुख है, जिसमें सेना प्रमुख से कहा गया कि जो उचित समझो, वो करो।”
राहुल गांधी ने कहा, “जब पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि चीनी टैंक कैलाश रिज (सीमा क्षेत्र) तक पहुंच गए हैं, तो हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह का कोई जवाब नहीं आया। नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा, एनएसए से पूछा और फिर से राजनाथ सिंह से पूछा। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। नरवणे ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं ‘टॉप’ से पूछता हूं। ‘टॉप’ से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें।”
कांग्रेस सांसद ने कहा, “हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में ‘टॉप’ ने मैसेज दिया कि ‘जो उचित समझो, वो करो।’ मतलब ‘टॉप’ ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि ‘आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है।'”
राहुल गांधी ने आगे कहा, “पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, ‘मुझे सच में बहुत अकेला महसूस हुआ। पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था।'”
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि अगर लोकसभा में प्रधानमंत्री आते हैं तो वह इस किताब को स्वयं उन्हें सौंपेंगे।


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