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राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, 2018 में दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग

Rahul Gandhi writes to Prime Minister Narendra Modi, demands withdrawal of case filed in 2018

3 अप्रैल । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र शेयर करते हुए लिखा कि 8 साल पहले एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई गिरफ्तार हुए। संसद ने कानून तो मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमे का बोझ उठा रहे हैं।

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में राहुल गांधी ने लिखा कि अनुरोध है कि 2 अप्रैल, 2018 को एससी/एसटी अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ पूरे देश में हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए। उस दिन 14 दलित युवाओं की दुखद मृत्यु हुई थी। ये विरोध प्रदर्शन उस न्यायिक फैसले के कारण शुरू हुए थे, जिसने एससी/एसटी एक्ट को कमजोर किया।

उन्होंने आगे लिखा कि यह कानून लाखों दलित और आदिवासी लोगों को न्याय और संरक्षा पाने का अधिकार देता है और हिंसा व भेदभाव के खिलाफ उनकी सुरक्षा करता है। यह कानून लंबे समय तक चले लोगों के आंदोलन का परिणाम है, जिसने अपराधियों की छूट को समाप्त किया और पीड़ितों को न्याय की मांग करने का साहस दिया।

2 अप्रैल के विरोध में यह भी देखा गया कि दलित और आदिवासी लोगों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव बढ़ रहा था। युवा प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर न्याय, समानता और सम्मान की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद कई निर्दोष युवाओं को गिरफ्तार किया गया और आज भी वे आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने सरकार से अनुरोध किया है और मांग की है कि 2 अप्रैल, 2018 के विरोध से जुड़े एससी/एसटी एक्ट युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की समीक्षा करें। सभी मामलों को वापस लें या रद्द करें। निर्दोष युवाओं को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बोझ से मुक्त करें।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पत्र शेयर करते हुए लिखा कि 8 साल पहले, एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई गिरफ्तार हुए। संसद ने कानून तो मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमे का बोझ उठा रहे हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि मजबूत एससी/एसटी एक्ट उनका हक है और शांतिपूर्ण आंदोलन उनका अधिकार। आज प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि संवेदनशील और न्यायपूर्ण दृष्टि से ये सभी मामले वापस लिए जाएं।

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