शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोमवार को फिर से दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जल्द ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभालने के लिए दिल्ली जाएंगे, जबकि फडणवीस ने इन अटकलों को सख्ती से खारिज कर दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बाहर के किसी व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए। 1991 का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी डॉ. मनमोहन सिंह को सौंपी थी।
राउत ने कहा, “शिक्षा मंत्रालय नंदन नीलेकणि जैसे किसी व्यक्ति को दिया जाना चाहिए। लेकिन अगर आप देवेंद्र फडणवीस के बारे में सोच रहे हैं, तो वे एक उपयुक्त विकल्प हैं।” राज्यसभा सांसद ने कहा, “मैं पूरे भरोसे के साथ कहता हूं कि चाहे वे कितना भी इनकार करें, वे ही अगले केंद्रीय शिक्षा मंत्री होंगे।” फडणवीस के इस दावे को खारिज करते हुए कि वे महाराष्ट्र की राजनीति में बने रहेंगे। राउत ने कहा कि यह फैसला आखिरकार मुख्यमंत्री फडणवीस के हाथ में नहीं है।
उन्होंने दावा किया, “वे कहते हैं कि वे महाराष्ट्र में रहेंगे लेकिन वे कहां रहेंगे, यह उनके हाथ में नहीं है। 2022 में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करना भी उनकी अपनी पसंद नहीं थी। जब उनका पद घटाया गया, तो आदेश सीधे मोदी और शाह की ओर से आए थे। भाजपा में आत्मसम्मान या योग्यता कहां है। अगर देश के शिक्षा मंत्री का चयन योग्यता के आधार पर किया जाना है, तो देवेंद्र फडणवीस ही वह नाम हैं जो अभी पीएम मोदी के मन में है।”
संजय राउत ने मौजूदा शिक्षा नीतियों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि संघ समर्थित व्यवस्था देश को पीछे ले जा रही है। उन्होंने कहा, “गरीबों के बच्चे संघ द्वारा लागू इस बेकार शिक्षा व्यवस्था में पढ़ रहे हैं जबकि नेताओं और मंत्रियों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं। पहले उन्हें यहीं पढ़ाइए।”
उन्होंने कहा, “पिछले दस वर्षों में संघ ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह के दौर तक, हमारे नेतृत्व की सोच आधुनिक थी और वे शिक्षा को महत्व देते थे। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान इसलिए स्थापित किए गए थे ताकि नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक को अपना सके।”
राउत ने सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने पिछले दशक में भारत की आधुनिक शिक्षा की नींव को कमजोर किया है। उद्धव सेना के नेता ने तर्क दिया कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक, सभी पूर्व प्रधानमंत्री प्रगतिशील नेता थे जिन्होंने आईआईटी और आईआईएम जैसे विश्व-स्तरीय संस्थान बनाए।
राउत ने आरोप लगाया, “नेहरू के समय से ही भारत की शिक्षा प्रणाली आधुनिक रही है। पिछले दस वर्षों में भाजपा ने इस आधुनिक सोच को खत्म कर दिया और देश को प्राचीन काल में धकेल दिया।” उन्होंने सवाल किया, “राजनेता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजते हैं, गरीब छात्रों को एक खराब व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे माहौल में नीलेकणि के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स क्या हासिल कर सकती है?”
राउत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने आधुनिक शिक्षा की जगह प्राचीन अवधारणाओं को अपना लिया है। उन्होंने कहा, “भाजपा ने अपना ध्यान गौशालाओं, चाय बेचने और पकौड़े तलने तक सीमित कर दिया है। ऐसे माहौल में नीलेकणि जैसा व्यक्ति क्या कर सकता है? देश की आधुनिक शैक्षिक नींव को बर्बाद करने के लिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक बयान पर पलटवार करते हुए राउत ने कहा कि जंतर-मंतर पर युवाओं ने एक चिंगारी जलाई है, और शिंदे को स्थिति को हल्के में लेने के बजाय चुप रहना चाहिए। राउत ने यह भी घोषणा की कि मुंबई के शिवाजी पार्क में हुई सभा के बाद विपक्ष का अगला विरोध प्रदर्शन शिंदे के राजनीतिक गढ़ ठाणे में होगा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की हिंसक कार्रवाई को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछेगा और बल प्रयोग तथा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग करेगा।


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