बरनाला जिला प्रशासन ने गेहूं की कटाई के इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में कथित लापरवाही के लिए 70 क्लस्टर, सहायक क्लस्टर और नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अधिकारियों ने 81 सत्यापित मामलों में 4.05 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया है।
उपायुक्त हरप्रीत सिंह ने कहा कि पुलिस और प्रशासनिक टीमों को सतर्क रहने और पराली जलाने की प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए लगातार जमीनी निरीक्षण करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पुलिस और नागरिक प्रशासन की टीमें पूरे जिले में तैनात कर दी गई हैं, जबकि तीनों उप-विभागीय मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत रूप से अभियानों की निगरानी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के अलावा, प्रशासन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार पराली जलाने में शामिल किसानों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर रहा है। सत्यापन के बाद एफआईआर दर्ज की जा रही है और पर्यावरण संबंधी मुआवजा लगाया जा रहा है।
उप आयुक्त ने किसानों से पर्यावरण के अनुकूल पराली प्रबंधन विधियों को अपनाने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण में भारी योगदान होता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, साथ ही पेड़ों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।


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