August 12, 2026
Entertainment

समाज लोगों को हीरो या विलेन बनाने में करता है जल्दबाजी, कम होता जा रहा ध्यान : जीत

Society is quick to cast people as heroes or villains; the focus is diminishing: Jeet

बंगाली सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता जीत एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक ही व्यक्ति को लेकर समाज की सोच बिल्कुल अलग नजर आती है। कोई उसे क्रांतिकारी मानता है तो कोई अपराधी। इसी विषय के बहाने जीत ने समाज के लोगों को जल्दी से हीरो या विलेन मान लेने की आदत पर अपनी राय रखी।

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में जीत ने कहा कि आज के दौर में लोग किसी व्यक्ति के बारे में पूरी बात या उसकी परिस्थितियों को समझने से पहले ही अपनी राय बना लेते हैं।

जीत ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ”मैं इस बात से सहमत हूं कि समाज अक्सर लोगों को बहुत जल्दी हीरो या विलेन की श्रेणी में रख देता है। इसका कारण समय की कमी है। आज लोगों के पास हर चीज के लिए बहुत कम समय है। इसी वजह से किसी व्यक्ति या घटना को गहराई से समझने के बजाय तुरंत फैसला सुनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।”

जीत ने इस मुद्दे पर आज की युवा पीढ़ी को लेकर सकारात्मक सोच भी जाहिर की। उन्होंने खास तौर पर जेनजी और आने वाली पीढ़ियों की तारीफ की। जीत ने कहा, ”आज की पीढ़ी काफी समझदार और स्मार्ट है। मैं खुद घर पर युवा पीढ़ी के लोगों के साथ रहता हूं और इसलिए मुझे करीब से समझने का मौका मिलता है। इसी अनुभव के आधार पर मैं मानता हूं कि जेनजी और उनसे आगे आने वाली पीढ़ियां कई मामलों में बेहद शानदार हैं।”

जीत की आने वाली बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी, केउ बोले डकैत’ इसी तरह के सवालों को कहानी के जरिए सामने रखती है। यह क्रांतिकारी अनंत सिंह के जीवन से प्रेरित बायोग्राफिकल एक्शन ड्रामा है। फिल्म के टाइटल का मतलब है, ‘कोई उन्हें क्रांतिकारी कहता है, तो कोई डाकू।’… फिल्म के टाइटल से ही साफ है कि कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देखने का नजरिया हर किसी के लिए अलग है।

पथिकृत बसु के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1960 के दशक के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी अनंत सिंह के रहस्यमयी व्यक्तित्व और उनके उन कामों को सामने लाती है, जिनकी वजह से समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ की गई उनकी साहसिक डकैतियों को कुछ लोग अपराध मानते हैं, जबकि कुछ लोग अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में देखते हैं।

फिल्म में इंस्पेक्टर दुर्गा रॉय अनंत सिंह के पीछे पड़ जाते हैं और उन्हें पकड़ने की कोशिश शुरू करते हैं। कहानी अलग-अलग समय के बीच आगे बढ़ती है और अनंत सिंह के अतीत को भी सामने लाती है। वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मास्टरदा सूर्य सेन के साथ काम करने वाले निडर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में नजर आते हैं। आजादी के बाद परिस्थितियां बदलती हैं और वह व्यवस्था से निराश होकर भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ एक नई लड़ाई शुरू करते हैं।

फिल्म में जीत के साथ तोता रॉय चौधरी, कौशिक सेन, रजत दत्त, चंदन सेन, लोकनाथ डे और मिमी चक्रवर्ती भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

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