तमिलनाडु के उडुमलपेट के पास तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का काम सरकार की मंजूरी के बाद फिर से शुरू हो गया है। वहीं स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से निगरानी बढ़ाने और मिट्टी निकालने व ले जाने में गड़बड़ी रोकने की मांग की है।
पश्चिमी घाट में स्थित तिरुमूर्ति बांध में आसपास के जंगल क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों और नालों का पानी आता है। परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (पीएपी) सिस्टम के तहत आने वाले बांधों से भी पानी इस जलाशय में लाया जाता है। यह बांध कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों में खेतों की सिंचाई में अहम भूमिका निभाता है।
पीएपी योजना के तहत लगभग 3,76,152 एकड़ जमीन को सिंचाई का लाभ मिलता है। वहीं ‘थाली’ और ‘वायपालयम’ नहरों के जरिए पुरानी आयकट प्रणाली के तहत 3,044 एकड़ जमीन की सिंचाई होती है। कई संयुक्त पेयजल योजनाएं भी इसी जलाशय पर निर्भर हैं।
गर्मी के मौसम और जलस्तर कम होने का फायदा उठाते हुए किसानों ने जलाशय में जमा गाद को निकालने की अनुमति मांगी थी। गाद निकालने का काम 27 जुलाई को शुरू हुआ था। लेकिन बाद में इसमें गड़बड़ी की शिकायतें जिला प्रशासन को मिलीं। शिकायतों के बाद अधिकारियों ने 31 जुलाई को काम को अस्थायी रूप से रोक दिया और बांध स्थल पर निरीक्षण किया।
बाद में किसानों ने सरकार से काम जारी रखने की अपील की। किसानों का कहना था कि पोषक तत्वों से भरपूर यह गाद मिट्टी की उर्वरता और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगी। यह मुद्दा राज्य विधानसभा में भी उठाया गया था। आखिरकार काम फिर से शुरू करने की अनुमति मिल गई और शुक्रवार को किसानों ने फिर से जलाशय से गाद निकालना शुरू कर दिया।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमति का दुरुपयोग न हो, इसके लिए लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि हर लाभार्थी द्वारा निकाली गई मिट्टी की मात्रा की जांच की जाए और देखा जाए कि क्या उसे परमिट में तय कृषि भूमि पर ही ले जाया जा रहा है।
लोगों ने यह भी मांग की कि जांच हो कि क्या बांध के कमांड क्षेत्र के बाहर के लोग, जो किसान नहीं हैं, व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए मिट्टी निकाल रहे हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि केवल तय गाद ही निकाली जाए और बजरी, लाल मिट्टी या अन्य निर्माण सामग्री को जलाशय क्षेत्र से अवैध रूप से न ले जाया जाए।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि सख्त निगरानी से ही असली किसानों को इस पहल का फायदा मिलेगा। जमा गाद को सही तरीके से खेतों में ले जाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, फसल की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आजीविका बेहतर होगी।


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