चिंताजनक प्रवृत्ति के रूप में, हिमाचल प्रदेश में 2026 की पहली तिमाही के दौरान यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पीओसीएसओ) अधिनियम, 2012 के तहत पंजीकृत नाबालिगों से जुड़े बलात्कार के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है।
हिमाचल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच राज्य में नाबालिगों के साथ बलात्कार के 49 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2025 में इसी अवधि के दौरान केवल पांच मामले दर्ज किए गए थे, जो लगभग आठ गुना वृद्धि दर्शाता है।
अब तक 13 मामले दर्ज होने के साथ, सिरमौर जिला राज्य में नाबालिगों के लिए सबसे अधिक असुरक्षित जिला बनकर उभरा है। गौरतलब है कि जिले में 2025 की पहली तिमाही में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।
चंबा में सात मामले, कुल्लू में छह, शिमला में पांच, कांगड़ा और बद्दी जिले में चार-चार और बिलासपुर में तीन मामले दर्ज किए गए। सोलन, हमीरपुर, ऊना और नूरपुर जिले में दो-दो मामले सामने आए, जबकि देहरा जिले में एक मामला दर्ज किया गया।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान लाहौल और स्पीति तथा किन्नौर ही ऐसे जिले रहे जहां ऐसे कोई मामले सामने नहीं आए। तुलनात्मक रूप से, 2025 की पहली तिमाही में शिमला, कांगड़ा, मंडी, किन्नौर और चंबा जिलों में केवल एक-एक मामला दर्ज किया गया था।
राज्य में नाबालिगों से जुड़े छेड़छाड़ के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। 2026 की पहली तिमाही में ऐसे पांच मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था। चंबा में सबसे अधिक दो मामले दर्ज किए गए, जबकि कुल्लू, कांगड़ा और सिरमौर में एक-एक मामला दर्ज किया गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता और सख्ती से निपटाया जा रहा है और आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को ऐसे अपराधों और पीओसीएसओ अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों में नियमित रूप से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।


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