कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान के लोग भाजपा सरकार से आक्रोशित हैं। इस सरकार कार्यशैली से खफा होकर युवाओं को आक्रोश अपने चरम पर पहुंच चुका है। इसी को देखते हुए युवा दोबारा से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हो रही है, क्योंकि उन्हें इस बात का डर है कि अगर दोबारा चुनाव हुए तो उन्हें आक्रोश झेलना पड़ेगा।
उन्होंने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार बैकफुट है। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पंचायत चुनाव कराने के आदेश दिए गए हैं। मैं हमेशा से ही इस चुनाव का पैरोकार रहा हूं। निश्चित तौर पर इस तरह के चुनाव होने चाहिए। इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी। लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
इसके अलावा, विधानसभा के मानसून सत्र पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, सरकार का आधे से ज्यादा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार जनता के सवालों का जवाब दे। सरकार अपने इन सवालों से बच नहीं पाएगी। उन्हें जनता और विपक्ष के कड़वे सवालों का सामना करना ही होगा। सरकार हठधर्मी बनी रही, लेकिन अंत में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार को पंचायत और नगर निकाय के चुनाव कराने के लिए राजी होना पड़ा। छात्र संघ के चुनाव भी होने हैं। इसे लेकर छात्र धरना कर रहे हैं। सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।
वहीं, उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बाद जब संसद पहुंचे, तो बीजेपी के नेता उनका ऐसे स्वागत कर रहे थे कि जैसे उन्होंने कोई किला फतह कर लिया है। पेपर लीक की वजह से तनाव में आकर कई छात्रों ने आत्महत्या की। इसके बाद पूरा देश और विपक्ष एकजुट हुआ। सभी ने धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव बनाया। तब जाकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनका संसद में सम्मान किया जाता है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार जनभावनाओं से काफी दूर हो चुकी है। सरकार को छात्रों से कोई लेना देना नहीं है। सरकार छात्रों के मुद्दों से दूर हो चुकी है। बार-बार वीडियो बनाकर या किसी भी प्रकार का बिल पारित करके जनता का विश्वास अर्जित नहीं किया जा सकेगा। सरकार को अब जमीन पर उतरकर छात्रों की समस्याओं को समझना होगा, तभी जाकर स्थिति धरातल पर सकारात्मक बन पाएगी।
साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं की ओर से किए जा रहे बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा का कोई नेता किसी भी मुद्दे पर कोई बयान देता है, तो जाहिर सी बात है कि अपनी पार्टी की अनुमति पर ही दे रहा है, क्योंकि मैं नहीं मानता हूं कि बीजेपी का कोई सांसद इस तरह का बयान दे सकता है।
वहीं, उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि आखिर क्यों लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी को बार-बार संसद में बोलने से रोका जा रहा है। इस देश में हमेशा से कांग्रेस की ही सरकार रही है और हमने हमेशा से ही नेता प्रतिपक्ष को सम्मान दिया है। लेकिन, मौजूदा समय में जिस तरह से राहुल गांधी को बोलने से रोका जा रहा है, वो गलत है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी के बयानों से केंद्र सरकार पर दबाव बन रहा है। इस वजह से वो लगातार नोटिस जारी कर रही है। लेकिन, मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि इस प्रकार के नोटिस से किसी भी प्रकार का फायदा होने वाला नहीं है। हम लोग डरने वाले नहीं हैं। हम हर हाल अपनी आवाज राष्ट्रहित में बुलंद करते रहेंगे।


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