राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने रविवार को यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं से बहुत उम्मीदें हैं और उनका मानना है कि अगर भारत की युवा पीढ़ी अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय हित की ओर लगाए तो देश वास्तव में एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा। दिल्ली में हाल ही में हुए ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कुछ “गुमराह” युवाओं को उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक प्रेरणा की आवश्यकता है।
उन्होंने दावा किया कि असामाजिक तत्व अक्सर अपने स्वार्थ के लिए ऐसी स्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे शिमला के लोक भवन में राष्ट्रीय एकीकृत कलाकार एवं कार्यकर्ता मंच (एनआईएफए) द्वारा आयोजित संवेदना-2 अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जहां स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से, स्वैच्छिक रक्तदान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव जीवन बचाने से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। उन्होंने कहा, “यद्यपि चिकित्सा विज्ञान ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी मानव रक्त का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान मानवता का एक नेक और अपरिहार्य कार्य है।” इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी उपस्थित लोगों को नशामुक्त भारत की शपथ दिलाई।
आज सुबह मोदी द्वारा शुरू किए गए “नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान” का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं को नशा मुक्त भारत बनाने के लिए एक आह्वान है। उन्होंने कहा कि यह पहल महज एक अभियान नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए एक जन आंदोलन है, और उन्होंने प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा पीढ़ी से, भारत को नशे की बुराई से मुक्त करने में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
एनआईएफए की मानवीय पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने राष्ट्र निर्माण, “युवा जागृति” और सार्वजनिक सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देकर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से आगे बढ़कर काम किया


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