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सरोगेसी के जज्बात ने जीता जापान का दिल, फिल्म ‘दुकान’ के प्रीमियर पर मिला स्टैंडिंग ओवेशन

The spirit of surrogacy won the hearts of Japan, with the film 'Dukaan' receiving a standing ovation at its premiere.

8 मई । हिंदी सिनेमा में अक्सर सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों को पर्दे पर उतारा जाता रहा है। इसी कड़ी में कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘दुकान’ को रिलीज होते ही दर्शकों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। यह फिल्म सरोगेसी जैसे जटिल और भावनात्मक विषय पर आधारित है।

खास बात यह है कि फिल्म का प्रीमियर जापान के प्रतिष्ठित ‘चौथे योकोहामा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में किया गया। 2 मई को रेड कार्पेट इवेंट के साथ फिल्म की शुरुआत हुई और इसके बाद 4 मई को ‘बेट्टी एंड डेक थिएटर’ में इसकी आधिकारिक स्क्रीनिंग रखी गई। स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों ने फिल्म को स्टैंडिंग ओवेशन दिया।

फिल्म के निर्माताओं ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा, “जापानी दर्शकों का प्यार पाना हमारे लिए एक यादगार अनुभव रहा। यह एक प्रतिष्ठित फेस्टिवल है और यहां जाना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।”

फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ सिंह और गरिमा वाहल ने किया है। उन्होंने फिल्म को लेकर बताया कि सरोगेसी की कहानी उनके दिल के करीब क्यों है। उन्होंने कहा, “एक लेखक के तौर पर हम भी अपनी स्क्रिप्ट को एक बच्चे की तरह पालते हैं, लेकिन आखिर में उसे किसी और के हवाले करना पड़ता है। इसी भावनात्मक समानता ने हमें ‘दुकान’ बनाने के लिए प्रेरित किया।”

फिल्म की कहानी जैस्मीन (मोनिका पंवार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सरोगेसी के जरिए निःसंतान जोड़ों के लिए ‘उम्मीदों की दुकान’ खोलती है, लेकिन बाद में भावनात्मक संघर्ष से गुजरती है।

गुजरात की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म में मोनिका पंवार, सिकंदर खेर, सोहम मजूमदार, और मोनाली ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। साथ ही, अभिनेता व्रजेश हिरजी ने भी इसमें एक विशेष कैमियो निभाया है। फिल्म का निर्माण वेवबैंड प्रोडक्शंस और कलमकार पिक्चर प्रोडक्शंस के बैनर तले ए. झुनझुनवाला और एस.के. अहलूवालिया ने किया है। अनिर्बान चटर्जी की सिनेमैटोग्राफी और श्रेयस पुराणिक का संगीत फिल्म की भावनाओं को और प्रभावी बनाता है।

यह फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि सरोगेसी की दुनिया के उन पहलुओं को भी दिखाती है जिन पर अक्सर चर्चा नहीं होती।

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