वॉशिंगटन, कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान के भीतर गिराए गए एक अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए एक उच्च जोखिम वाला अभियान चलाया। इसमें एक जटिल सैन्य ऑपरेशन का इस्तेमाल किया गया, ताकि उसे शत्रुतापूर्ण क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
यह मिशन ईरान के ऊपर एक अमेरिकी एफ-15ई फाइटर जेट के गिराए जाने के बाद शुरू हुआ, जिसमें एक क्रू सदस्य लगभग दो दिनों तक फंसा रहा जबकि ईरानी सुरक्षा बल उसकी तलाश कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्टपोलिटिको के अनुसार, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने धोखे की रणनीति के तहत झूठी जानकारी फैलाई कि पायलट को पहले ही ढूंढ लिया गया है और उसे देश से बाहर ले जाया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “सीआईए ने ईरान के भीतर यह खबर फैलाई कि अमेरिकी बलों ने पायलट को ढूंढ लिया है और उसे जमीन के रास्ते देश से बाहर निकाला जा रहा है।” इस रणनीति का उद्देश्य ईरानी खोज टीमों को भ्रमित करना और अमेरिकी बलों को लापता पायलट की सटीक लोकेशन का पता लगाने का समय देना था।
पोलिटिको ने कहा, “इस चाल ने सीआईए को गिराए गए विमान के पायलट का पता लगाने और उसकी सटीक लोकेशन को चुपचाप व्हाइट हाउस और पेंटागन तक पहुंचाने के लिए समय दिया।”
जमीन पर पायलट ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में गिरफ्तारी से बचते हुए जीवित रहने की कोशिश की। सीएनएन के अनुसार, वह पहाड़ी इलाकों में अकेले छिपा रहा, ऊंचाई पर चढ़ता रहा और ईरानी गश्ती दलों से बचते हुए एक दरार (क्रेविस) में शरण ली।
उसके पास सीमित उपकरण थे, जिनमें एक पिस्तौल, संचार उपकरण और एक ट्रैकिंग बीकन शामिल था। एक दिन से अधिक समय तक वह अमेरिकी बलों की पहुंच से बाहर रहा जबकि वे उसे खोजने की कोशिश कर रहे थे।
अमेरिकी सेना ने एक बड़े स्तर का सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक, निगरानी विमान और हवाई समर्थन शामिल थे। सीएनएन के अनुसार, इस मिशन में आर्मी डेल्टा फोर्स और नेवी सील टीम सिक्स जैसी एलीट यूनिट्स भी शामिल थीं।
विमान के पायलट को पहले ही बचा लिया गया था लेकिन दूसरा क्रू सदस्य लापता रहा, जिससे खोज अभियान और तेज कर दिया गया।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह बचाव अभियान जल्द ही अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बन गया। रिपोर्ट में कहा गया, “अमेरिकी सेना और सीआईए ने ईरान के ऊपर गिराए गए फाइटर जेट के एक क्रू सदस्य को बचाने के लिए एक उच्च जोखिम वाला मिशन समन्वित किया।”
जब पायलट की स्थिति की पुष्टि हो गई, तो अमेरिकी कमांडो अंधेरे की आड़ में आगे बढ़े। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, युद्धक विमानों ने पास के इलाकों में हमले कर ईरानी बलों को पास आने से रोकने के लिए समर्थन दिया।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया, “कमांडो ने अपने हथियारों से जोरदार फायरिंग की ताकि आसपास मौजूद ईरानी बल उनके करीब न आ सकें।”
बचाव अभियान के दौरान कुछ जटिलताएं भी सामने आईं। ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए विमानों को जमीन पर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे कमांडरों को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा और अतिरिक्त सहायता बुलानी पड़ी।
इन बाधाओं के बावजूद, अमेरिकी बलों ने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया और पायलट को सुरक्षित निकाल लिया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान की सराहना करते हुए इसे “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसिक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक” बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमने गंभीर रूप से घायल और बेहद बहादुर एफ-15 क्रू सदस्य/अधिकारी को ईरान के पहाड़ों के भीतर से बचा लिया है… सभी का अद्भुत साहस और कौशल!”
उन्होंने यह भी कहा कि बचाव से पहले ईरानी बल “बड़ी संख्या में उसकी तलाश कर रहे थे और उसे पकड़ने के करीब पहुंच चुके थे।”
इस ऑपरेशन में सैन्य और खुफिया संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल हुआ। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, इसमें स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेस, कई विमान और अंतिम समय में सीआईए की धोखे की रणनीति शामिल थी।
यह स्थिति बेहद संवेदनशील थी। अगर पायलट को पकड़ लिया जाता, तो ईरान को संघर्ष में बड़ा फायदा मिल सकता था, जिससे उसे वार्ता या प्रचार में बढ़त मिलती।
इस घटना ने अमेरिकी वायुसेना के क्रू के लिए सर्वाइवल ट्रेनिंग के महत्व को भी उजागर किया। पूर्व सैन्य अधिकारियों ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ऐसी परिस्थितियां “उच्च स्तर की ट्रेनिंग” को दर्शाती हैं, जो पायलटों को कठिन हालात में मजबूत बनने और दुश्मन से बचने के लिए तैयार करती है।

