September 12, 2026
National

त्रिपुरा की चाय ने 15.31 मीट्रिक टन के एक्सपोर्ट कंसाइनमेंट के साथ यूरोप के बाजार में कदम रखा

Tripura tea has entered the European market with an export consignment of 15.31 metric tonnes.

त्रिपुरा की चाय ने शुक्रवार को यूरोप के बाजार में 15.31 मीट्रिक टन के कंसाइनमेंट के साथ कदम रखा। यह त्रिपुरा टी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीटीडीसीएल) द्वारा अब तक भेजा गया चाय का सबसे बड़ा सिंगल शिपमेंट है। 15,310 किलोग्राम वजन वाले इस उच्च-गुणवत्ता वाली चाय के कंसाइनमेंट को औपचारिक रूप से पश्चिम त्रिपुरा के दुर्गाबाड़ी स्थित सेंट्रल टी प्रोसेसिंग फैक्ट्री (सीटीपीएफ) से कोलकाता के रास्ते यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए रवाना किया गया।

उद्योग और वाणिज्य सचिव किरण गिट्टे, टीटीडीसीएल के चेयरमैन समीर रंजन घोष और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कुमार दास ने शुक्रवार को चाय के इस कंसाइनमेंट को हरी झंडी दिखाई। घोष ने कहा कि यह शिपमेंट राज्य की उस कोशिश में एक अहम पड़ाव है, जिसके तहत त्रिपुरा की चाय को भौगोलिक सीमाओं से बाहर ले जाकर बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सके। यह कंसाइनमेंट कॉरपोरेशन के पिछले सबसे बड़े शिपमेंट (जो इस साल की शुरुआत में गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर भेजा गया था और 8,200 किलोग्राम का था) से लगभग दोगुना है, जो त्रिपुरा के चाय सेक्टर की बढ़ती कमर्शियल क्षमता को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से स्थानीय चाय उत्पादकों के लिए नए मौके बनने और अंतरराष्ट्रीय चाय बाजार में राज्य की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। घोष के मुताबिक, राज्य सरकार चाय उत्पादकों और निर्माताओं के लिए मार्केटिंग और बेहतर कीमत पाने की सुविधा के लिए अगरतला टी ऑक्शन सेंटर स्थापित करने पर भी काम कर रही है।

प्रस्तावित ऑक्शन सेंटर से चाय उत्पादकों, निर्माताओं, ब्रोकरों, खरीदारों, वेयरहाउस और अन्य स्टेकहोल्डर्स को एक कॉमन टेक्नोलॉजी-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर लाने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक बिडिंग और ज्‍यादा लोगों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धी कीमत तय करने और त्रिपुरा में उत्पादित चाय के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

टीटीडीसीएल अधिकारियों के अनुसार, ऑक्शन सेंटर से फ्रेट, वेयरहाउसिंग, सैंपलिंग, हैंडलिंग और अन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च भी कम हो सकते हैं, जिससे प्रति किलोग्राम लगभग 6-10 रुपए की बचत होने का अनुमान है।

दशकों से त्रिपुरा में चाय उत्पादक राज्य के तौर पर काफी क्षमता रही है, लेकिन मार्केटिंग, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स, बेहतर कीमत पाने और बड़े बाजारों तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार का मकसद अब राज्य के चाय सेक्टर को सिर्फ उत्पादन से आगे ले जाकर त्रिपुरा को नॉर्थ-ईस्ट में चाय के व्यापार का एक बड़ा केंद्र बनाना है। इससे निवेश आकर्षित करने और रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है, साथ ही सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल इकोसिस्टम भी मजबूत हो सकता है।

इस बीच, ‘त्रिपुरेश्वरी चाय’ को स्थानीय राशन की दुकानों के जरिए भी बांटा जा रहा है, जिससे राज्य के चाय उत्पादों तक लोगों की पहुंच बढ़ रही है। अभी त्रिपुरा में 54 बड़े चाय बागान हैं, जिनमें सरकारी टीटीडीसी और त्रिपुरा कोऑपरेटिव सोसाइटी के साथ-साथ निजी मालिकों के बागान भी शामिल हैं।

लगभग 2,800 छोटे चाय उत्पादक राज्य के कुल चाय उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं। राज्य में सालाना लगभग 90 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। इस उत्पादन का 60 प्रतिशत से ज्‍यादा हिस्सा अभी राज्य के बाहर नीलामी बाजारों में बेचा जाता है। अगले साल तक त्रिपुरा में अपना चाय नीलामी केंद्र भी खुलने वाला है, जिससे राज्य के बेवरेज (पेय पदार्थ) उद्योग को बड़ी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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