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गर्दन के दर्द और अकड़न से परेशान? सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से राहत दिलाएंगे ये योगासन

Troubled by neck pain and stiffness? These yoga poses will provide relief from cervical spondylosis.

योग दिवस को महज एक महीना शेष रह गया है। इस बीच भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार लोगों को योग के जरिए स्वस्थ रहने के लिए जागरुक कर रहा है। मंत्रालय का संदेश साफ है “योग-युक्त रहें, रोग-मुक्त रहें”। इस कड़ी में मंत्रालय ने गर्दन की लगातार अकड़न और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए योगासन व उनके लाभ बताए हैं।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, आजकल स्क्रीन के सामने लंबे समय तक झुके रहना और गलत मुद्रा में बैठना सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का मुख्य कारण बन गया है। यह समस्या सिर्फ गर्दन के दर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि गतिशीलता को सीमित कर देती है और रोजमर्रा के साधारण कामों को भी कठिन बना देती है। लंबे समय तक यह अंदरूनी तनाव बढ़ाती है और ऊपरी पीठ के साथ गर्दन की मांसपेशियों को कमजोर कर देती है।

ऐसे में योग एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नियमित योगाभ्यास इस समस्या का प्राकृतिक और प्रभावी समाधान है। योगासन रीढ़ की हड्डी के जोड़ों को लचीला बनाते हैं, अकड़न को दूर करते हैं और गर्दन तथा ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। इससे गतिशीलता वापस आती है और दर्द में काफी कमी आती है।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में लाभदायक योगासनों में अर्ध मत्स्येंद्रासन, उष्ट्रासन, ताड़ासन, अर्ध चक्रासन, भुजंगासन के साथ ही मार्जरीआसन भी शामिल है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि इन आसनों का नियमित अभ्यास करने से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस को नियंत्रित किया जा सकता है और गतिशीलता वापस पाई जा सकती है। इन आसनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। योग न सिर्फ शारीरिक दर्द बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है।

अर्ध मत्स्येंद्रासन रीढ़ को घुमाकर गर्दन और पीठ की अकड़न दूर करता है, उष्ट्रासन छाती के अंगों की जकड़न को दूर कर उसे खोलता है और गर्दन के साथ कंधों की जकड़न को भी कम करता है। वहीं, ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारता है और रीढ़ को मजबूती देता है और अर्ध चक्रासन कमर के साथ गर्दन के लचीलेपन को भी बढ़ाता है। पीठ की मांसपेशियों को भुजंगासन मजबूत बनाता है और दर्द से राहत देता है। साथ ही, मार्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह से लचीला बनाकर तनाव मुक्त करने में कारगर है।

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