February 7, 2026
National

रायपुर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे की शुरुआत

Union Home Minister Amit Shah arrives in Raipur, begins three-day Chhattisgarh tour

7 फरवरी । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों ने रायपुर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री एयरपोर्ट से होटल मेफेयर के लिए रवाना हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ में तीन दिवसीय प्रवास पर हैं। अपने दौरे के दौरान वे राज्य की आंतरिक सुरक्षा, विकास और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर कई अहम बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

रायपुर पहुंचने के बाद अमित शाह ने होटल मेफेयर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

अमित शाह 8 फरवरी को रायपुर में आयोजित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) पर सुरक्षा समीक्षा बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा वे ‘छत्तीसगढ़@25 : शिफ्टिंग द लेंस’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कॉनक्लेव कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री 9 फरवरी को बस्तर दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे ‘बस्तर पंडुम-2026’ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर कार्यक्रम का समापन करेंगे।

बता दें कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया। सीएम साय ने इसकी जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि आज बस्तर की ऐतिहासिक धरती पर ‘बस्तर पंडुम-2026’ का भव्य शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से हुआ। यह अवसर केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा, जनजातीय समाज की आस्था, परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का गौरवपूर्ण क्षण है।

सीएम ने आगे लिखा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय जीवन-दर्शन, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेश-भूषा और पारंपरिक कला-शिल्प की जीवंत प्रस्तुति विश्व के सामने बस्तर की विशिष्ट पहचान को और सशक्त बनाएगी। 12 विधाओं में होने वाले विविध सांस्कृतिक आयोजन जनजातीय गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करेंगे। बस्तर में आज भय की जगह भरोसे और हिंसा की जगह विश्वास ने ले ली है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां आज संस्कृति, शिक्षा और विकास की नई धुन सुनाई दे रही है। यही परिवर्तन नए विकसित और सुरक्षित बस्तर की पहचान है।

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