जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को उनके पद से हटाने के लिए एक नोटिस पेश करने की बात कही। उधमपुर ईस्ट से भाजपा विधायक आर.एस. पठानिया ने स्पीकर को बताया कि भाजपा ने उन्हें पद से हटाने के लिए नोटिस दिया है।
पठानिया ने सदन में स्पीकर को जानकारी दी कि पार्टी ने स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए संबंधित नियमों के तहत एक नोटिस सौंपा है। हालांकि, स्पीकर ने कहा कि उन्हें हटाने के लिए दिए गए नोटिस को सदन की प्रक्रिया के अनुसार वोटिंग के लिए लिस्ट करना होगा, और ‘प्रश्न काल’ के दौरान इस पर विचार नहीं किया जा सकता।
इससे भाजपा विधायक नाराज हो गए और सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर नारेबाजी करने लगे। हालांकि, स्पीकर ने ‘प्रश्न काल’ जारी रखने का फैसला किया, क्योंकि एनसी और कांग्रेस विधायकों ने सवाल पूछे, जिनका जवाब स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू और ग्रामीण विकास मंत्री जावेद राणा ने दिया।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने सदन में एक छोटा भाषण दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव में एनसी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा देश के संविधान की भावना के खिलाफ है और इसलिए भाजपा को मंजूर नहीं है।
सुनील शर्मा ने साफ किया कि भाजपा जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370, स्वायत्तता या 1953 से पहले की स्थिति पर किसी भी चर्चा का विरोध करेगी।
शर्मा की ये बातें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव को लेकर चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच आई हैं। इस प्रस्ताव में विधानसभा के पुराने प्रस्तावों, जिसमें 2000 का स्वायत्तता प्रस्ताव भी शामिल है, का जिक्र किया गया है।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले बोलते हुए, शर्मा ने सवाल किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव में 2000 के प्रस्ताव का जिक्र क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले ही स्वायत्तता प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और वह अनुच्छेद 370 या स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर दोबारा चर्चा नहीं होने देगी।
शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया। खबरों के मुताबिक, इस बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें विधानसभा का मौजूदा सत्र भी शामिल था।
विपक्ष के नेता ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जिन मुद्दों पर फैसला हो चुका है, उन पर केंद्र का रुख साफ है। भाजपा नेता ने 1953 से पहले की स्थिति का जिक्र करने पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य का दर्जा देने वाले मौजूदा प्रस्ताव के जरिए ऐसे मुद्दों को फिर से नहीं उठाया जा सकता।
साथ ही, शर्मा ने सरकार को राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर पूरी बहस करने की चुनौती दी और कहा कि भाजपा ऐसी चर्चा में हिस्सा लेने के लिए तैयार है। उन्होंने सदन में प्रस्तावों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विवादित मुद्दों पर चर्चा की इजाजत दी जा रही है।
इस मुद्दे पर विधानसभा के अंदर तीखी बहस हो चुकी है और बीजेपी विधायकों ने राज्य का दर्जा देने वाले प्रस्ताव का विरोध किया है।


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