N1Live National हमें सदैव एकता और सौहार्द के साथ कार्य करने चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
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हमें सदैव एकता और सौहार्द के साथ कार्य करने चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी

We must always work with unity and harmony: Prime Minister Modi.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकजुटता और आपसी सद्भाव का संदेश देते हुए शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया। प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक “सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते॥” को रेखांकित किया। इस श्लोक का भावार्थ है- हम सब साथ मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे मन व विचार एक हों। जिस प्रकार प्राचीनकाल में देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते थे, ठीक उसी तरह हमें भी हमेशा एकता और सौहार्द के साथ कार्य करना चाहिए।

पीएम मोदी की ओर से बीते दिन गुरुवार को संस्कृत सुभाषित शेयर कर लिखा गया था, “संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।”

प्रधानमंत्री की ओर से एक श्लोक “स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।” साझा किया गया था। जिसका हिंदी अर्थ है कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख प्राप्त करता है, स्वतंत्रता से ही सर्वोच्च उपलब्धि पाता है, स्वतंत्रता से ही वह शांत अवस्था को प्राप्त होता है और स्वतंत्रता के माध्यम से ही वह परम पद को प्राप्त करता है।

प्रधानमंत्री ने बुधवार 24 जून को राष्ट्र की समृद्धि को लेकर संस्कृत सुभाषित शेयर किया था। उन्होंने लिखा था, “सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है। यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।”

पीएम ने संस्कृत श्लोक ‘यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता। नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥’ शेयर किया, जिसका हिंदी अर्थ है कि जहां परिश्रम राष्ट्रभक्ति के प्रखर उत्साह से प्रेरित होता है, जहां आलस्य से पूर्णत: रहित होकर निरंतर कर्तव्य किए जाते हैं और जहां विनम्रता साहस के साथ संतुलित होती है, वहीं त्याग, तप और समर्पण से राष्ट्र की समृद्धि सदा अटल और चिरस्थायी बनी रहती है।

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