July 29, 2026
Entertainment

जब संजय दत्त को लगा ‘जिंदगी खतरे में है’, नौकर के आंसुओं ने बदला पूरा व्यक्तित्व

When Sanjay Dutt felt his ‘life was in danger’, a servant’s tears transformed his entire personality.

29 जुलाई । ‘मुन्ना भाई’, ‘वास्तव’ के रघु और ‘अग्निपथ’ के कांचा चीना जैसे यादगार किरदारों को पर्दे पर जिंदा करने वाले संजय दत्त की असली जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। बड़े पर्दे पर उन्होंने कभी मासूम दोस्त का किरदार निभाया तो कभी खतरनाक विलेन बनकर दर्शकों को हैरान किया, लेकिन कैमरे के पीछे उनकी जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें अंदर तक बदल दिया।

उन्होंने ऐसे दौर भी देखे, जब वह खुद अपनी जिंदगी से लड़ रहे थे। नशे की लत ने उन्हें इस कदर घेर लिया था कि एक समय उन्हें लगा कि शायद वह अपनी जिंदगी खो देंगे। उस मुश्किल वक्त में घर के एक नौकर की आंखों के आंसुओं ने उन्हें अपनी हालत का एहसास कराया और यही पल उनकी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ था। वह हिंदी सिनेमा के मशहूर कलाकार सुनील दत्त और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त के बेटे हैं। बचपन से ही उनका रिश्ता फिल्मों और कला की दुनिया से रहा। यही वजह थी कि कम उम्र में ही उनका झुकाव अभिनय की तरफ बढ़ने लगा। उन्होंने साल 1971 में आई फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में एक बाल कलाकार के रूप में काम किया था।

साल 1981 में फिल्म ‘रॉकी’ से संजय दत्त ने बतौर अभिनेता बॉलीवुड में शुरुआत की। इस फिल्म को उनके पिता सुनील दत्त ने निर्देशित किया था। फिल्म सफल रही और संजय दत्त रातोंरात चर्चा में आ गए। हालांकि, इसी दौर में उनकी मां नरगिस दत्त का निधन हो गया, जिससे वह अंदर तक टूट गए। सफलता मिलने के बाद भी संजय दत्त की जिंदगी आसान नहीं रही। कॉलेज के दिनों में वह नशे की लत में फंस गए। धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ गई कि उनके परिवार को भी चिंता होने लगी। संजय दत्त ने खुद कई इंटरव्यू में बताया कि वह नशे की दुनिया में इस कदर चले गए थे कि उन्हें अपनी जिंदगी की कोई परवाह नहीं थी।

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एक बार वह इतना ज्यादा नशे में थे कि लगातार करीब दो दिन तक सोते रहे। जब उनकी आंख खुली तो उन्होंने अपने नौकर से खाना मांगा। लेकिन नौकर उन्हें देखकर रोने लगा। संजय ने जब रोने की वजह पूछी तो उसने बताया कि वह इतने लंबे समय से सो रहे थे कि घर के सभी लोग डर गए थे और उन्हें लगा था कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए। उस पल उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि उनकी जिंदगी खतरे में है। उन्हें लगा कि अगर उन्होंने खुद को नहीं संभाला तो वह खत्म हो जाएंगे।

इसके बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त से मदद मांगी और कहा कि वह इस जिंदगी से बाहर निकलना चाहते हैं। परिवार ने उनका साथ दिया और इलाज के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे नशे की आदत से छुटकारा पाया।

नशे से बाहर आने के बाद संजय दत्त ने अपने करियर में शानदार वापसी की। उन्होंने ‘नाम’, ‘साजन’, ‘सड़क’, ‘खलनायक’, ‘वास्तव’, ‘मिशन कश्मीर’ जैसी फिल्मों में यादगार काम किया। साल 1999 में आई फिल्म ‘वास्तव: द रियलिटी’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।

इसके बाद फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ ने उनकी छवि पूरी तरह बदल दी। मुन्ना भाई के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘कांटे’, ‘अग्निपथ’, ‘पीके’ और ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

संजय दत्त की जिंदगी में विवाद भी रहे। 1993 मुंबई बम धमाके मामले में हथियार रखने के आरोप में उन्हें कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और बाद में उन्हें जेल की सजा हुई। साल 2016 में सजा पूरी करने के बाद उन्होंने फिर फिल्मों में वापसी की।

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