July 28, 2026
Entertainment

आईएफएफएम में ‘पल भर के लिए’ का वर्ल्ड प्रीमियर, विनीत कुमार सिंह बोले- ‘दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचेगी हमारी कहानी’

World premiere of ‘Pal Bhar Ke Liye’ at IFFM; Vineet Kumar Singh says, “Our story will reach audiences across the globe.”

अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने एक्टिंग करियर में हर बार ऐसे किरदार चुने, जो दर्शकों के दिलों में जगह बना गए। ‘मुक्काबाज’ से लेकर ‘छावा’, ‘सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव’ और ‘जाट’ जैसी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ने वाले विनीत अब एक और खास वजह से चर्चा में हैं। उनकी नई फिल्म ‘पल भर के लिए’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर शुरुआत करने जा रही है।

इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर ऑस्ट्रेलिया में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (आईएफएफएम) में होगा। इस खास मौके पर विनीत ने खुशी जाहिर की और उम्मीद जताई है कि फिल्म की कहानी दुनिया भर के दर्शकों के दिलों तक पहुंचेगी।

विनीत कुमार सिंह ने फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर को लेकर कहा, ”किसी भी फिल्म का सफर जब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच से शुरू होता है, तो वह बेहद खास अनुभव होता है। ‘पल भर के लिए’ ऐसी कहानी है, जो पूरी टीम के बहुत करीब है और समाज से जुड़े अहम विषय को सामने लाती है। मुझे बेहद खुशी है कि फिल्म की पहली मुलाकात दर्शकों से इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे बड़े मंच पर होगी। मुझे उम्मीद है कि यह कहानी अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों के दिलों तक पहुंचेगी।”

इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्मकार और डिजाइनर विक्रम फडनिस ने किया है। फिल्म में विनीत कुमार सिंह के साथ अभिनेत्री सैयामी खेर और अभिनेता ताहिर राज भसीन भी अहम किरदार में नजर आएंगे। फिल्म को आधिकारिक तौर पर इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है।

विनीत कुमार सिंह के बारे में बात करें, तो वह अपने अभिनय के साथ-साथ हिंदी भाषा के प्रति गहरे लगाव को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बॉलीवुड में हिंदी फिल्मों की स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखे जाने पर अपनी राय पेश की थी। उन्होंने कहा था, ”मैं हमेशा से चाहता हूं कि मेरे डायलॉग्स देवनागरी लिपि में दिए जाएं। मैं उसी में पढ़ने और समझने में सहज महसूस करता हूं। मेरा मानना है कि जब फिल्म हिंदी में बन रही है, तो उसकी स्क्रिप्ट और डायलॉग भी हिंदी की अपनी लिपि में होने चाहिए।”

उन्होंने कहा था, ”इस पर हर कलाकार की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि हिंदी फिल्मों का काफी काम आज भी अंग्रेजी में होता है। हिंदी भाषा को उसकी अपनी लिपि में सम्मान मिलना चाहिए।”

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