August 16, 2022
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‘पाकिस्तान ने यूएनएससी सदस्यता के लिए भारत के प्रयास को किया विफल’

इस्लामाबाद, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का स्थायी सदस्य बनने के भारत के प्रयास को एक बार फिर विफल कर दिया है, जिसे वह नई दिल्ली के खिलाफ अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रदर्शित कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि भारत को स्थायी सदस्य बनने के लिए यूएनएससी के वैश्विक मंच के अन्य सदस्य राष्ट्रों से न्यूनतम समर्थन की कमी है, जबकि भारत के लिए यूएनएससी की सदस्यता का विरोध करने और सदस्यता के मानदंडों पर बहस जारी रखने का आग्रह करने के पाकिस्तान के रुख को स्वीकार कर लिया गया है।

पाकिस्तान ने यूएनएससी की स्थायी सदस्यता की एक निश्चित अवधि और हर दो या पांच साल के बाद उसके चुनाव पर जोर दिया है, एक ऐसा तर्क, जो यूएनएससी में चल रही बहस का हिस्सा है।

रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि पाकिस्तान ने यूएनएससी के स्थायी सदस्य बनने के भारत के प्रयास का विरोध किया है और साथ ही उसने नई दिल्ली पर यूएनएससी के प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान का दावा है, “भारत को संयुक्त राष्ट्र चार्टर में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल रहा है, जबकि भारतीय समूह ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) का समर्थन भी खो दिया है।”

पाकिस्तान ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष और मजबूत अर्थव्यवस्था होने का दावा करने के बावजूद यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनने के मानदंडों को पूरा करने में भी विफल रहा है।”

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत को स्थायी सदस्य बनने के लिए कम से कम 129 सदस्य राष्ट्रों का समर्थन प्राप्त करने की आवश्यकता है। हालांकि, राजनयिक सूत्रों ने कहा कि भारत आवश्यक राष्ट्रों की संख्या का आधा समर्थन पाने में भी विफल रहा है।

एक राजनयिक सूत्र ने कहा, “पाकिस्तान के रुख को अरब लीग और अफ्रीकी संघ का समर्थन प्राप्त है।”

इस साल अप्रैल के दौरान, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन के लिए लंबे समय से चल रही वार्ता में गतिरोध को दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के बीच आवश्यक सहमति प्राप्त करने के लिए लचीलेपन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला था।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने कहा कि सुरक्षा परिषद सुधार में प्रगति की धीमी गति प्रक्रिया में किसी कमी के कारण नहीं है, बल्कि यह ‘कुछ अलग-अलग राष्ट्रों की अनम्यता (इनफ्लैक्सिबिलिटी)’ के कारण है।

सुरक्षा परिषद के सुधारों पर बहस फरवरी 2009 में शुरू हुई थी, जहां सदस्यता की विभिन्न श्रेणियों को खुली चर्चा के लिए टेबल पर लाया गया था। वीटो की शक्ति, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, एक विस्तृत सुरक्षा परिषद का आकार और महासभा के साथ संबंधों के संदर्भ में परिषद के कामकाज के तरीकों पर सदस्य राष्ट्रों के बीच बहस हुई है।

पाकिस्तान का कहना है कि सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की प्रक्रिया अवरुद्ध है, क्योंकि भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान यानी जी-4 राष्ट्र परिषद में स्थायी सीटों के लिए जोर देते रहते हैं, वहीं इटली और पाकिस्तान के नेतृत्व वाला यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (यूएफसी) समूह किसी भी अतिरिक्त स्थायी सदस्य का विरोध करता है।

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