पुराना महिला आरक्षण बिल लाओ—सच सामने आ जाएगा” — Priyanka Gandhi Vadra कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह महिलाओं के आरक्षण से जुड़े पुराने विधेयक को दोबारा पेश करे। यह बयान उस समय आया जब Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 लोकसभा में विशेष सत्र के दौरान पारित नहीं हो सका। सत्र के अंतिम दिन से पहले एएनआई से बातचीत में उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वह उसी पुराने विधेयक को वापस लाए, जिसे पहले सभी दलों का व्यापक समर्थन प्राप्त था।
उन्होंने कहा, “सरकार को चाहिए कि वह पुराना महिला आरक्षण विधेयक, जिसे सभी पार्टियों ने पहले समर्थन दिया था, तुरंत सोमवार को संसद में लाए। सोमवार को संसद बुलाइए, बिल पेश कीजिए और फिर देखिए कौन महिला विरोधी है। हम सभी उसका समर्थन करेंगे और आपके साथ वोट करेंगे।”
उनकी यह टिप्पणी सत्तारूढ़ भाजपा-नीत सरकार और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आई है। प्रस्तावित विधेयक, जिसमें महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से जोड़ा गया था, आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। मतदान में 298 सदस्य इसके पक्ष में और 230 इसके विरोध में थे। Om Birla ने पुष्टि की कि संशोधन पारित नहीं हुआ है, जिसके बाद संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने घोषणा की कि सरकार इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।
भाजपा ने विपक्षी दलों पर ऐतिहासिक सुधार को रोकने का आरोप लगाया है, जिसका उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना था। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों ने इस विधेयक को पारित होने से रोका और इसके राजनीतिक परिणामों की चेतावनी दी।
वहीं विपक्ष का कहना है कि वह सिद्धांत रूप में महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध करता है। Rahul Gandhi ने इस विधेयक को भारत की चुनावी संरचना में बदलाव का प्रयास बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के रूप में पेश किया।


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