April 5, 2025
National

कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 25 में 29.7 प्रतिशत बढ़ा, डिस्पैच में 33 प्रतिशत का हुआ इजाफा : केंद्र सरकार

Coal production increased by 29.7 percent in FY25, dispatch increased by 33 percent: Central Government

कोयला मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 25 में कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों से उत्पादन बढ़कर 190.95 मिलियन टन हो गया है। इसमें वित्त वर्ष 24 में हुए 147.11 मिलियन टन के उत्पादन के मुकाबले 29.79 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों से रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इसके अलावा, कोयला डिस्पैच सालाना आधार पर 33.36 प्रतिशत बढ़कर 190.42 मिलियन टन हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2023-24 में 142.79 मिलियन टन था।

मंत्रालय ने कहा कि ये आंकड़े इस क्षेत्र की मजबूती, दक्षता और भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। बिजली, स्टील और सीमेंट जैसे अहम इंडस्ट्री कोयला क्षेत्र पर निर्भर करती है।

सरकार ने कहा कि कैप्टिव खदानों से कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 24.72 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, डिस्पैच में भी 27.76 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं, कमर्शियल खादनों से कोयला उत्पादन में सालाना आधार पर 67.32 प्रतिशत का इजाफा हुआ और कोयला डिस्पैच में 76.71 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है।

बड़ी मात्रा में कोयले का उत्पादन बढ़ने से देश ऊर्जा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इससे वैश्विक इकोनॉमिक पावरहाउस के रूप में देश की स्थिति भी मजबूत हो रही है।

बीते महीने के अंत में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के ताजा अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष 1 मार्च तक भारत के पास कोयला और लिग्नाइट के क्रमशः 389.42 अरब टन और 47.29 अरब टन भंडार मौजूद हैं, जो देश की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।

उन्होंने आगे कहा कि देश के मौजूदा कोयला भंडार का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है और देश की ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत हिस्सा कोयला से पूरा किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें कोयला ब्लॉकों के विकास में तेजी लाने के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा की जाने वाली नियमित समीक्षा भी शामिल है।

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