झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (जेएसएससी सीजीएल) परीक्षा के रिजल्ट पर रोक बरकरार रखा है। बुधवार को चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच में संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अब तक हुई जांच में पेपर लीक का आरोप निराधार पाया गया है। महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट से परीक्षा के रिजल्ट पर लगाई गई रोक जारी रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि इस मामले में चल रही जांच में यह बात सामने आ रही है कि पेपर लीक होने की अफवाह फैलाई गई थी। इस पर कोर्ट ने पूछा कि जांच पूरी होने में कितना वक्त लगेगा? सरकार की ओर से बताया गया कि लगभग एक माह का वक्त और लग सकता है।
इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच पूरी होने पर इसकी रिपोर्ट निचली अदालत में जमा की जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे कोई आदेश जारी करेगा। कोर्ट ने तब तक रिजल्ट पर रोक बरकरार रखते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की है।
राज्य में करीब दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति के लिए जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा 21-22 सितंबर को 823 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई थी। परीक्षा में 3 लाख 4 हजार 769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
जेएसएससी ने इस परीक्षा के आधार पर 5 दिसंबर, 2024 को 2,145 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया था। इसी बीच परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर राजेश कुमार एवं अन्य ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इस पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 को परिणाम प्रकाशित करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को पेपर लीक की शिकायत पर परीक्षा संचालन अधिनियम 2023 के तहत एफआईआर दर्ज करने और अनुसंधान कर इसकी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद झारखंड का अपराध अनुसंधान विभाग एफआईआर दर्ज कर जांच कर रहा है।