April 17, 2026
National

अल्पसंख्यकों, ओबीसी और दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी न की जाए : असदुद्दीन ओवैसी

The interests of minorities, OBCs and southern states should not be ignored: Asaduddin Owaisi

17 अप्रैल । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान कहा कि यह बिल ऐसे समय में लाया जा रहा है, जब कई जगहों पर चुनाव चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह अपनी बहुमत के आधार पर कानून बना रही है। अगर ये तीनों बिल कानून बन जाते हैं तो विपक्ष की आवाज इस सदन में लगभग खत्म हो जाएगी।

ओवैसी ने कहा कि अगर इस संवैधानिक संशोधन बिल को परिसीमन बिल के साथ पढ़ा जाए तो सीटों का बंटवारा आबादी के आधार पर होगा यानी जिनकी आबादी ज्यादा होगी, उन्हें ज्यादा सीटें मिलेंगी और जिनकी कम होगी, उन्हें कम सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा कि परिसीमन हर 10 साल में जनगणना के आधार पर नहीं होगा, बल्कि सरकार तय करेगी कि कब और किस जनगणना के आधार पर होगा।

उन्होंने कहा कि वह क्षेत्रवाद का समर्थन नहीं करते, लेकिन हमारे संविधान में ‘भाईचारे’ (फ्रेटरनिटी) का सिद्धांत बहुत अहम है, जो देश की एकता और अखंडता को मजबूत करता है। ये तीनों बिल इस भावना के खिलाफ जाते हैं।

ओवैसी ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो उत्तर भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और दक्षिण भारत पर निर्भरता बढ़ेगी। दक्षिणी राज्यों का देश की जीडीपी और टैक्स राजस्व में बड़ा योगदान है, लेकिन उन्हें कम प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने सच्चर कमेटी का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को सीमित किया गया है और परिसीमन से यह स्थिति और खराब हो सकती है।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि अगर लोकसभा में सीटों का पुनर्वितरण हुआ तो कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा और कुछ का घटेगा। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय को पहले ही वोटर सूची संशोधन, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य नीतियों के जरिए हाशिए पर किया जा रहा है।

ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम देश को एक संघीय ढांचे से एक केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर ले जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा जैसे देशों की तरह एक संतुलित मॉडल अपनाया जाना चाहिए, जिसमें राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिले।

उन्होंने सरकार से अपील की कि अल्पसंख्यकों, ओबीसी और दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी न की जाए, क्योंकि इससे देश की एकता और लोकतंत्र कमजोर हो सकता है।

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