July 21, 2026
National

शिंदे गुट ने छह सांसदों के विलय के फैसले को बताया संविधान और कानून के अनुरूप

The Shinde faction termed the decision regarding the merger of six MPs as being in accordance with the Constitution and the law.

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों के शिवसेना (शिंदे गुट) में विलय को मान्यता दिए जाने का शिंदे गुट के नेताओं ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के कमजोर होने का संकेत और एकनाथ शिंदे की प्रगतिशील राजनीति की जीत बताया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। संसद के मानसून सत्र से पहले लिया गया यह फैसला दलबदल विरोधी कानून के तहत उनके पार्टी बदलने को वैध ठहराता है। अब ये छह सांसद उद्धव ठाकरे गुट के नहीं, बल्कि शिंदे गुट के सांसद माने जाएंगे।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का आदेश साफ करता है कि यह फैसला संविधान के दायरे में लिया गया है। उन्होंने कहा, “इन छह सांसदों ने कोई गैरकानूनी कदम नहीं उठाया है। कानून उन्हें यह अधिकार देता है कि अगर उनके पास दो तिहाई बहुमत है तो वे किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।”

उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी से उठ चुका है। उन्होंने कहा, “पार्टी लगातार छोटी होती जा रही है, टूट रही है और बिखर रही है। अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश में वे सिर्फ ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ कर रहे हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने अपनी मूल हिंदुत्व विचारधारा छोड़ दी है और ऐसे दलों के साथ गठबंधन कर लिया है, जिनकी सोच उनकी विचारधारा के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने भगवान राम से भी अपना नाता तोड़ लिया था। उन्होंने कहा कि अब जब पार्टी टूट रही है तो वे भगवान राम का नाम ले रहे हैं।

निरुपम ने कहा, “राम के विरोधियों के साथ रहते हुए ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ करना वैसा ही है जैसे रावण भगवान राम की स्तुति करे।”

शिवसेना की एक अन्य नेता शाइना एनसी ने भी बागी सांसदों को मिली मान्यता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि नेताओं का भरोसा एकनाथ शिंदे की प्रगतिशील राजनीति में बढ़ रहा है। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) से यह भी कहा कि उसे इस बात पर विचार करना चाहिए कि उसके नेता और कार्यकर्ता लगातार हमारी पार्टी में क्यों शामिल हो रहे हैं।

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